पंजाब विधानसभा ने बाबू कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार से सर्वोच्च सम्मान देने की अपील की।
पंजाब विधानसभा में समाज सुधारक और प्रख्यात राजनीतिक नेता कांशीराम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की मांग वाला ऐतिहासिक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। यह प्रस्ताव राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में पेश किया, जिसमें केंद्र सरकार से बाबू कांशीराम को भारत रत्न देने की सिफारिश की गई है।
प्रस्ताव पारित होने के बाद पंजाब सरकार अब इसे औपचारिक रूप से केंद्र सरकार को भेजेगी। विधानसभा में सभी दलों ने एकजुट होकर बाबू कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग का समर्थन किया।
सामाजिक समानता के लिए समर्पित रहा जीवन
सदन में प्रस्ताव रखते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि बाबू कांशीराम ने B. R. Ambedkar की विचारधारा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि समाज में सामाजिक और आर्थिक समानता का संदेश घर-घर तक पहुंचाने में बाबू कांशीराम का योगदान ऐतिहासिक रहा है।
उन्होंने कहा कि बाबू कांशीराम को भारत रत्न दिया जाना उनके संघर्ष और समाज के लिए किए गए योगदान का उचित सम्मान होगा। चीमा ने यह भी कहा कि बाबू कांशीराम ने अपनी पूरी जिंदगी दलित, वंचित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दी।
सरकारी नौकरी छोड़कर शुरू किया सामाजिक आंदोलन
वित्त मंत्री ने बताया कि बाबू कांशीराम ने पुणे में एक गजेटेड अधिकारी के रूप में अपना करियर छोड़ दिया था ताकि वे जातिगत भेदभाव के खिलाफ संघर्ष कर सकें। इसके बाद उन्होंने ‘ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनॉरिटी कम्युनिटीज एम्प्लॉइज फेडरेशन (BAMCEF)’ की स्थापना की और सामाजिक जागरूकता का व्यापक अभियान शुरू किया।
चीमा ने कहा कि बाबू कांशीराम के प्रयासों से हजारों युवाओं को राजनीति में आने की प्रेरणा मिली। यही कारण है कि आज कई राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन बाबू कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग कर रहे हैं।
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पंजाब सरकार ने विरासत को संरक्षित करने की पहल की
वित्त मंत्री ने बताया कि हाल ही में उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगी Harjot Singh Bains के साथ रोपड़ जिले के ख्वासपुरा गांव और आनंदपुर साहिब के पृथीपुर बुंगा का दौरा किया, जो बाबू कांशीराम से जुड़े महत्वपूर्ण स्थान हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने उनकी स्मृति को सम्मान देने के लिए एक स्थानीय स्कूल के पुनर्निर्माण और उन्नयन के लिए ₹2 करोड़ की राशि स्वीकृत की है।
इसके अलावा उनके पैतृक गांव में एक आधुनिक पुस्तकालय और ऑडिटोरियम बनाने की भी मंजूरी दी गई है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान से प्रेरणा ले सकें। सरकार का मानना है कि बाबू कांशीराम को भारत रत्न देने से देशभर में सामाजिक न्याय के उनके संदेश को और मजबूती मिलेगी।
पहले भी उठ चुकी है मांग
चीमा ने बताया कि Arvind Kejriwal ने वर्ष 2016 में ही बाबू कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की थी। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि सामाजिक न्याय के लिए उनके संघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान दिया जाए।
सदन में अपने संबोधन के अंत में हरपाल सिंह चीमा ने सभी सदस्यों से अपील की कि वे एकजुट होकर बाबू कांशीराम को भारत रत्न देने की सिफारिश का समर्थन करें। इसके बाद प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया, जिससे पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार को एक मजबूत संदेश भेजा है।
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