दिल का दौरा या दिल का धड़कन अचानक बंद हो जाना को हार्ट अटैक कहा जाता है। आपके पास संपूर्ण जानकारी ना होने के कारण लोग अक्सर अपने दिल का ख्याल रखना भूल जाते हैं, या तो इस पर ध्यान ही नहीं देते। हमेशा लोगों को यह कहते सुना होगा कि अपने पूरी 70 साल की उम्र में भी डाॅक्टर या अस्पताल तक का मुंह ही नहीं देखा। यही गलती बहुत बड़ी कारण बन सकती है आपके हार्ट फेल होने की सही समय पर रोग की पहचान ना होने के कारण रोग को अंतिम चरण में पहुंचने पर जो बिमारी कुछ दवाईयों से ठीक की जा सकती थी उसके लिए सर्जरी करनी पड़ जाती है। अगर आंकड़े को देखा जाए तो दुनिया में सालाना 8 से 10 मिलियन लोग हार्ट फेलियर से अपना जीवन गंवा देते हैं। मृत्यू के आंकड़े में भारत दुनिया से 20% ज्यादा है और मरने वाले मरीजों की आयू दुनिया में दस वर्ष कम है। आइए हम आपको बताते हैं कि आप अपने दिल को स्वस्थ्य रखने के लिए अपने दिल की रेगुलर जांच कब कराए।

अगर आप 35-36 वर्ष के हैं
अगर आप 35-36 वर्ष की श्रेणी में आते हैं, तो आप सबसे ज्यादा खतरे में हैं। डाक्टर्स की सलाह माने तो 35 वर्ष के उपर के पुरुष और 40 वर्ष से ऊपर की महिलाएं अपने दिल की जांच प्रति वर्ष कराना चाहिए। अगर फैमिली हिस्ट्री है तो आपको यह सलाह दि गई है कि आप 25 वर्ष से ऊपर होने पर अपने शरीर की रेगुलर जांच कराए।

इन लंक्षणों को ना करे नजर अंदाज
-छाती में दर्द होना
-बांह का शून्य होना
-सिर में दर्द रहना
-कमजोरी रहना

जांच के प्रकार
-EKG, ECG (Electrocardiogram) और Ecocardiogram आपके दिल की गहराई से जांच करती है। यह आपके हार्ट फेलियर के रिस्क को कम करती है।
– एंजियोग्राफी से भी डाक्टर्स आपके दिल की जांच करते हैं।

डाक्टर से कब मिले
अगर आपके सीने में दर्द , सांस लेने में तकलीफ, बांई हाथ में दर्द या शून्य हो जाना, अधिक पसीना आना तो आप अपने डाक्टर से संपर्क करे।