राज्यदिल्ली

‘श्रीराम आस्था हैं या सिर्फ चुनावी मुद्दा?’ अमित शाह से AAP नेता संजीव झा के तीखे सवाल

आम आदमी पार्टी के नेता संजीव झा ने अमित शाह से पूछा- रामलला के दर्शन के लिए अब तक अयोध्या क्यों नहीं गए? धार्मिक आस्था और राजनीति पर उठाए सवाल

AAP नेता संजीव झा ने अमित शाह से पूछा कि क्या श्रीराम आस्था का विषय हैं या सिर्फ चुनावी मुद्दा? अयोध्या दर्शन को लेकर भी उठाए सवाल।

आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और विधायक संजीव झा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लेते हुए भगवान श्रीराम को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनावों के दौरान लगातार भगवान श्रीराम के नाम पर वोट मांगती है, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि उनके लिए श्रीराम आस्था का विषय हैं या केवल राजनीतिक लाभ का माध्यम।

संजीव झा ने अपने बयान में कहा कि भाजपा नेताओं की ओर से चुनावी मंचों पर श्रीराम का नाम बार-बार लिया जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उनकी आस्था कितनी दिखाई देती है, यह भी जनता को जानना चाहिए।

अयोध्या यात्रा को लेकर उठाए सवाल

AAP नेता ने अमित शाह से सवाल करते हुए कहा कि यदि भगवान श्रीराम के प्रति इतनी श्रद्धा है तो अब तक उन्होंने अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन क्यों नहीं किए। उन्होंने पूछा कि क्या रामलला के दर्शन करना उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं है या फिर यह केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित विषय है।

संजीव झा ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए भगवान श्रीराम केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि विश्वास, संस्कृति और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों को भी इस विषय पर अपनी वास्तविक प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए।

धार्मिक भावनाओं के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा वर्षों से श्रीराम के नाम का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए करती रही है। झा का कहना है कि धार्मिक आस्था को वोट बैंक की राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए और जनता को यह समझने का अधिकार है कि नेताओं की कथनी और करनी में कितना अंतर है।

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AAP नेता ने कहा कि अगर किसी नेता के लिए भगवान श्रीराम वास्तव में आस्था का विषय हैं, तो यह उनकी व्यक्तिगत और सार्वजनिक गतिविधियों में भी दिखाई देना चाहिए।

राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज

संजीव झा के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अयोध्या, राम मंदिर और धार्मिक मुद्दों को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच लंबे समय से राजनीतिक बहस चलती रही है। ऐसे में यह बयान एक बार फिर धर्म और राजनीति के संबंधों पर नई बहस को जन्म दे सकता है।

जनता से जुड़े सवालों का जवाब मांगा

संजीव झा ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है, बल्कि जनता के मन में उठ रहे सवालों को सामने रखना है। उन्होंने अमित शाह से इन सवालों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और उन्हें केवल चुनावी मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म होने की संभावना है।

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