ग्रहण में खाने-पीने की चीजों में तुलसी डालने का विज्ञान और महत्व
ग्रहण में खाने-पीने की चीजों में तुलसी डालना क्यों जरूरी है? जानें विज्ञान और आयुर्वेद के अनुसार भोजन की सुरक्षा, पोषक तत्व और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के तरीके।
जैसे ही सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण की खबर आती है, घरों में खास तैयारी शुरू हो जाती है। खासतौर पर खाने-पीने की चीजों में तुलसी डालने का एक प्राचीन परंपरा रही है। आयुर्वेद और शास्त्रों के अनुसार, तुलसी का पत्ता भोजन को दूषित होने से बचाता है और इसे सात्विक बनाता है।
ग्रहण के दौरान भोजन ‘अपवित्र’ क्यों हो जाता है, इसका कारण है सूर्य या चंद्रमा की किरणों में रुकावट। इससे वातावरण में सूक्ष्म जीवाणु तेजी से बढ़ सकते हैं और भोजन जल्दी खराब हो सकता है। ऐसे में खाने-पीने की चीजों में तुलसी डालना भोजन की सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक माना जाता है।
तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-रेडिएशन गुण पाए जाते हैं। जब हम खाने-पीने की चीजों में तुलसी डालते हैं, तो यह भोजन के चारों ओर एक रक्षा कवच बना देता है, जो हानिकारक कीटाणुओं और विकिरण से सुरक्षा करता है।
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धार्मिक दृष्टिकोण से भी खाने-पीने की चीजों में तुलसी डालना शुभ माना जाता है। तुलसी को शुद्ध माना गया है और यह घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखती है। ऐसा करने से न केवल भोजन शुद्ध रहता है, बल्कि परिवार में भी स्वास्थ्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
ग्रहण के दौरान खाने-पीने की चीजों में तुलसी डालने की विधि सरल है: भोजन के बर्तन में तुलसी के पत्ते डालें, जल चढ़ाएं और शास्त्रों के अनुसार प्रार्थना करें। आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी लाभकारी है।
इस प्रकार, खाने-पीने की चीजों में तुलसी केवल शास्त्रों के अनुसार नहीं, बल्कि भोजन को सुरक्षित रखने और स्वास्थ्य बनाए रखने का सबसे आसान तरीका है।
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