धर्म

शुक्र प्रदोष व्रत 2026: शुक्रवार को करें व्रत, भगवान शिव दूर करेंगे सभी दुख

16 जनवरी 2026 को शुक्रवार को विशेष शुक्र प्रदोष व्रत। इस दिन व्रत कथा का पाठ और भगवान शिव की पूजा से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को विशेष शुभ प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन भक्तजन भगवान शिव की पूजा और व्रत कथा का पाठ करके जीवन में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति कर सकते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, हर महीने में त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। वर्ष 2026 का पहला प्रदोष व्रत माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ रहा है, जो शुक्रवार के दिन है। इसे विशेष रूप से शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है।

प्रदोष व्रत का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं। इस व्रत का पालन करने से न केवल जीवन में ऐश्वर्य आता है बल्कि कष्ट और परेशानियों का निवारण भी होता है।

शुक्र प्रदोष व्रत कथा (Shukra Pradosh Vrat Katha)

पुराणों में शुक्र प्रदोष व्रत की कथा वर्णित है। कथा के अनुसार प्राचीन समय में एक नगर में तीन मित्र रहते थे। इनमें एक ब्राह्मण, दूसरा धनिक और तीसरा राजा का पुत्र था। तीनों मित्र गहरे संबंधों में बंधे हुए थे और सभी विवाहित थे। हालांकि, धनिक मित्र की पत्नी अभी तक मायके में ही थी।

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एक दिन तीनों मित्र आपस में बैठकर स्त्रियों की महिमा पर चर्चा कर रहे थे। बातचीत के दौरान ब्राह्मण मित्र ने कहा, “नारीहीन घर में भूतों का निवास हो जाता है।” इस बात को सुनकर धनिक पुत्र ने तय कर लिया कि वह अपनी पत्नी को मायके से लेकर आएगा।

धनिक पुत्र के माता-पिता ने उसे समझाया कि वर्तमान समय में शुक्र अस्त हैं, जो वैवाहिक जीवन के लिए अशुभ हैं। इसके बावजूद धनिक पुत्र ने उनकी सलाह नहीं मानी और अपनी पत्नी को लेने के लिए निकल पड़ा।

रास्ते में उसकी पत्नी और वह कई संकटों का सामना करने लगे। बैलगाड़ी का पहिया टूट गया, बैल घायल हो गया और डाकुओं ने उनके धन को लूट लिया। घर लौटते समय धनिक पुत्र को सांप ने काट लिया और वैद्य ने कहा कि तीन दिन बाद उसकी मृत्यु हो सकती है।

ब्राह्मण मित्र ने इस संकट का कारण समझा और धनिक पुत्र के पिता को सलाह दी कि शुक्र प्रदोष व्रत रखें और भगवान शिव की पूजा करें। पिता ने व्रत रखा और पुत्र को उसकी पत्नी के साथ सुरक्षित भेजा। व्रत और शिव की पूजा के प्रभाव से धनिक पुत्र स्वस्थ हो गया और उसके जीवन की सारी कठिनाइयाँ दूर हो गईं।

शुक्र प्रदोष व्रत कैसे करें?

व्रत का समय: त्रयोदशी तिथि के दिन विशेष रूप से शुक्रवार को व्रत शुरू करें।

पूजा विधि: भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करें, बेलपत्र, धतूरा और जल अर्पित करें।

कथा का पाठ: व्रत कथा का पाठ अवश्य करें।

संकल्प: व्रत करते समय मन में भगवान शिव की कृपा और जीवन में सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

फलों का दान: व्रत के समाप्ति पर गरीबों को भोजन या वस्त्र दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

शुभ फल और महत्व

जीवन में सुख-शांति और ऐश्वर्य की प्राप्ति।

वैवाहिक जीवन में सौभाग्य और प्रेम में वृद्धि।

सभी प्रकार के संकट और दुखों का निवारण।

भगवान शिव की कृपा से रोग और संकटों से मुक्ति।

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