नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है? जानिए सर्प पूजा की पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व
नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है? जानिए राजा जनमेजय, तक्षक नाग और आस्तीक मुनि से जुड़ी पौराणिक कथा और इस पर्व का धार्मिक महत्व।
सावन माह में आने वाले प्रमुख त्योहारों में नाग पंचमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। श्रद्धालु नाग देवता को दूध, जल, फल-फूल और लावा अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
नाग पंचमी का संबंध भगवान शिव और नाग देवता की उपासना से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में महादेव की पूजा के साथ नाग देवता का स्मरण करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इस पर्व को प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है।
नाग पंचमी की पौराणिक कथा क्या है?
पौराणिक कथा के अनुसार, कुरुवंश के राजा परीक्षित को एक ऋषि के श्राप के कारण तक्षक नाग ने डस लिया था। इसके बाद राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए सभी नागों का विनाश करने का संकल्प लिया।
उन्होंने नागों के विनाश के लिए एक विशाल सर्प सत्र यज्ञ शुरू करवाया। यज्ञ में मंत्रों के प्रभाव से बड़ी संख्या में सर्प खिंचकर अग्निकुंड में गिरने लगे। इससे नागों में भय फैल गया। अपनी रक्षा के लिए तक्षक नाग देवराज इंद्र की शरण में पहुंच गए।
जब यज्ञ की शक्ति से तक्षक को भी अग्निकुंड की ओर खींचे जाने की स्थिति बनी, तब देवताओं ने नागों की रक्षा के लिए प्रयास किया।
आस्तीक मुनि ने रुकवाया सर्प यज्ञ
कथा के अनुसार, माता मनसा देवी के पुत्र आस्तीक मुनि राजा जनमेजय के यज्ञ स्थल पर पहुंचे। अपने ज्ञान और मधुर वचनों से उन्होंने राजा को प्रसन्न किया। राजा जनमेजय ने उनसे अपनी इच्छा के अनुसार वरदान मांगने को कहा।
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तब आस्तीक मुनि ने सर्प सत्र यज्ञ को रोकने और नागों को जीवनदान देने का वर मांगा। राजा ने अपना वचन निभाते हुए यज्ञ को समाप्त कर दिया। इस तरह तक्षक नाग समेत अनेक सर्पों के प्राण बच गए।
इसी दिन से जुड़ी है नाग पंचमी की मान्यता
धार्मिक कथा के अनुसार, जिस दिन आस्तीक मुनि ने यज्ञ रुकवाकर नागों की रक्षा की, वह सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी। मान्यता है कि यज्ञ की अग्नि से नागों को राहत देने के लिए उन पर जल और दूध अर्पित किया गया था।
इसके बाद नागों ने आशीर्वाद दिया कि पंचमी तिथि पर उनकी श्रद्धापूर्वक पूजा करने वाले लोगों को सर्प भय से रक्षा मिलेगी। इसी धार्मिक मान्यता को नाग पंचमी के पर्व से जोड़ा जाता है।
नाग पंचमी पर क्यों की जाती है नाग देवता की पूजा?
नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं हैं। श्रद्धालु इस दिन नाग देवता को जल, दूध, लावा और पुष्प अर्पित करते हैं। कई लोग भगवान शिव की भी विशेष पूजा करते हैं, क्योंकि शिवजी के गले में नाग विराजमान रहते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं में भी इस दिन की पूजा को महत्वपूर्ण बताया गया है। कुछ मान्यताओं के अनुसार नाग देवता की आराधना से कुंडली में मौजूद सर्प संबंधी दोषों की शांति के लिए पूजा की जाती है। हालांकि, ऐसी मान्यताएं धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित हैं।
नाग पंचमी का धार्मिक महत्व
नाग पंचमी केवल नाग देवता की पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह मनुष्य और प्रकृति के बीच संबंध का भी प्रतीक माना जाता है। भारतीय परंपरा में नागों को लंबे समय से देवत्व से जोड़ा गया है। सावन के दौरान शिव आराधना के साथ नाग पूजा की परंपरा इस पर्व को और विशेष बनाती है।
इस दिन श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और सुरक्षा की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से नाग देवता की कृपा प्राप्त होती है।
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