धर्म

हरियाली तीज 2026 तिथि: 14 या 15 अगस्त, जानें कब रखा जाएगा हरियाली तीज का व्रत, पूजा मुहूर्त और सिंधारा की परंपरा

हरियाली तीज 2026 का व्रत 15 अगस्त को रखा जाएगा। जानें पूजा मुहूर्त, तिथि, सिंधारा परंपरा, हरे रंग और झूला झूलने से जुड़ी खास बातें।

हरियाली तीज 2026 Date: सावन महीने में आने वाला हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ व्रत रखती हैं। अविवाहित युवतियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं।

इस साल हरियाली तीज 2026 की तिथि को लेकर 14 और 15 अगस्त को लेकर सवाल है। पंचांग गणना के अनुसार श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि 14 अगस्त 2026 की शाम 6:46 बजे शुरू होगी और 15 अगस्त 2026 की शाम 5:28 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।

15 अगस्त को रखा जाएगा हरियाली तीज 2026 का व्रत

धार्मिक पंचांग परंपरा में व्रत और त्योहारों के लिए उदयातिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी आधार पर इस बार हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त को रखा जाएगा।

हरियाली तीज को लेकर महिलाओं में खास उत्साह रहता है। इस दिन हरे रंग के कपड़े पहनना, हरी चूड़ियां पहनना और मेहंदी लगाना पर्व की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।

हरियाली तीज 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

हरियाली तीज के दिन पूजा के लिए बताया गया शुभ समय सुबह 7:29 बजे से 9:28 बजे तक है। इसके बाद राहुकाल शुरू होने की बात कही गई है।

पूजा के दौरान महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव का स्मरण कर सुखी दांपत्य जीवन, अखंड सौभाग्य और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।

माता पार्वती से जुड़ी है हरियाली तीज की मान्यता

हरियाली तीज से जुड़ी धार्मिक मान्यता भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह से जुड़ी है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी।

शिव पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वर मांगने के लिए कहा। धार्मिक मान्यता में इसी प्रसंग को हरियाली तीज के व्रत से जोड़ा जाता है।

इसलिए इस दिन महिलाएं माता पार्वती को आदर्श सुहाग और दांपत्य सुख की देवी के रूप में पूजती हैं।

हरियाली तीज पर क्यों पहना जाता है हरा रंग?

हरियाली तीज सावन के मौसम में आती है। इस दौरान चारों तरफ हरियाली दिखाई देती है और प्रकृति अपने खूबसूरत रूप में नजर आती है। इसी वजह से हरे रंग को इस पर्व से विशेष रूप से जोड़ा जाता है।

धार्मिक और लोक परंपराओं में हरा रंग हरियाली, प्रकृति, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं इस दिन हरी साड़ी या सूट, हरी चूड़ियां और मेहंदी के साथ सोलह श्रृंगार करती हैं।

सिंधारा के बिना अधूरा माना जाता है तीज का उत्सव

हरियाली तीज की प्रमुख लोक परंपराओं में सिंधारा का विशेष स्थान है। इसमें नवविवाहिता बेटी के मायके से उसके ससुराल में कपड़े, श्रृंगार सामग्री, मिठाइयां और अन्य उपहार भेजे जाते हैं।

राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित कई क्षेत्रों में सिंधारा की परंपरा उत्साह के साथ निभाई जाती है। इसे बेटी के प्रति मायके के प्रेम और उसके सुखी दांपत्य जीवन की शुभकामनाओं से जोड़कर देखा जाता है।

सिंधारे में आमतौर पर हरी साड़ी या सूट, चूड़ियां, मेहंदी, बिंदी, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री के साथ मिठाइयां, फल, सूखे मेवे और पूजा सामग्री शामिल की जाती है। कई परिवारों में सिंधारा तीज से एक दिन पहले भेजने की परंपरा है।

हरियाली तीज पर क्यों झूला झूलती हैं महिलाएं?

हरियाली तीज के मौके पर पेड़ों पर झूले डालकर महिलाओं के झूला झूलने की परंपरा काफी लोकप्रिय है। सावन में बारिश के बाद प्रकृति हरी-भरी हो जाती है और मौसम में उत्सव का माहौल रहता है।

झूला झूलना इसी प्राकृतिक सुंदरता और सावन के उल्लास से जुड़ी लोक परंपरा है। हालांकि, प्रमुख धर्मग्रंथों में झूला झूलने का प्रत्यक्ष धार्मिक विधान मिलने की बात नहीं कही जाती। इसे मुख्य रूप से तीज और सावन से जुड़ी पारंपरिक लोक संस्कृति का हिस्सा माना जाता है।

also read:- अगस्त में कब रखा जाएगा श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत? जानें…

कुंवारी लड़कियां भी कर सकती हैं माता पार्वती की पूजा

हरियाली तीज केवल विवाहित महिलाओं तक सीमित नहीं है। कई स्थानों पर अविवाहित कन्याएं भी माता पार्वती की पूजा करती हैं और मनचाहे जीवनसाथी की कामना करती हैं।

वे श्रद्धा के तौर पर माता गौरी को चूड़ियां, मेहंदी, चुनरी और अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित कर सकती हैं। हालांकि, अविवाहित कन्याओं के लिए सुहाग सामग्री धारण करने की परंपरा अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती है।

हरियाली तीज 2026 कब है?

उदयातिथि के अनुसार हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।

हरियाली तीज की तिथि कब शुरू होगी?

हरियाली तीज की तृतीया तिथि 14 अगस्त 2026 की शाम 6:46 बजे शुरू होने की जानकारी दी गई है।

हरियाली तीज की तिथि कब खत्म होगी?

तृतीया तिथि 15 अगस्त 2026 की शाम 5:28 बजे समाप्त होगी।

हरियाली तीज 2026 की पूजा का मुहूर्त क्या है?

दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार पूजा का शुभ समय सुबह 7:29 बजे से 9:28 बजे तक बताया गया है।

हरियाली तीज पर सिंधारा में क्या भेजते हैं?

सिंधारे में कपड़े, चूड़ियां, मेहंदी, बिंदी, सिंदूर, मिठाइयां, फल, सूखे मेवे और पूजा सामग्री जैसी चीजें भेजने की परंपरा है।

हरियाली तीज पर झूला क्यों झूलते हैं?

झूला झूलना सावन, बारिश, हरियाली और उत्सव से जुड़ी पारंपरिक लोक परंपरा है। इसे धार्मिक ग्रंथों में अनिवार्य पूजा-विधान के रूप में नहीं बताया जाता।

For English Newshttp://newz24india.in

Related Articles

Back to top button