धर्म

अधिकमास 2026: क्या सगाई या शादी की बात पक्की करना अशुभ है? जानें धार्मिक मान्यता

अधिकमास में शादी और सगाई जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन बात पक्की करना अशुभ है या नहीं, जानें पूरी धार्मिक मान्यता।

अधिकमास 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार अधिकमास को अत्यंत पवित्र और धार्मिक दृष्टि से विशेष महीना माना जाता है। यह मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस अवधि में पूजा-पाठ, जप-तप और दान का विशेष महत्व होता है।

इसी बीच लोगों के मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या अधिकमास में शादी या सगाई की बात पक्की करना भी अशुभ होता है?

अधिकमास में मांगलिक कार्य क्यों वर्जित माने जाते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इसका कारण यह है कि इस माह में सूर्य संक्रांति नहीं होती, जिससे शुभ कार्यों के लिए आवश्यक ऊर्जा और शुभ प्रभाव कम माना जाता है।

इसी वजह से अधिकमास को साधना और आध्यात्मिक कार्यों का समय माना जाता है।

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क्या अधिकमास में शादी सगाई की बात पक्की करना अशुभ है?| अधिकमास 2026

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार अधिकमास में विवाह या सगाई की “तारीख तय करना” या “रोका करना” पूरी तरह वर्जित नहीं है।

केवल शादी-विवाह का आयोजन नहीं किया जाता
लेकिन बात पक्की करने में कोई कठोर निषेध नहीं है
कई ज्योतिषाचार्य इसे तटस्थ या सामान्य मानते हैं

हालांकि कुछ विद्वान सलाह देते हैं कि यदि आवश्यक न हो तो इस अवधि में भी मांगलिक निर्णय टालना बेहतर होता है।

शास्त्रों के अनुसार क्या कहा गया है?

शास्त्रों के अनुसार अधिकमास में शुभ कार्यों के लिए ग्रहों की स्थिति, विशेषकर सूर्य, गुरु और शुक्र की भूमिका देखी जाती है।

इस माह में सूर्य संक्रांति नहीं होती, इसलिए शुभ कार्यों के लिए आवश्यक “सूर्य बल” कमजोर माना जाता है। इसी कारण विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों को स्थगित रखने की परंपरा है।

अधिकमास 2026 की धार्मिक मान्यता

इस वर्ष अधिकमास 17 मई से 15 जून तक मनाया जा रहा है। यह समय विशेष रूप से पूजा, ध्यान, व्रत और दान के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

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