श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए शिव के एक भक्त ने 120 किलो सोने का गुप्त दान किया है। बताया जा रहा है यह भक्त दक्षिण भारत का रहने वाला है। दिए गए इस गुप्त सोने से पिछले 10 दिन के अंदर मंदिर के गर्भगृह के अंदर स्वर्ण पत्तर लगाए जा चुके हैं। और अब यह बाहर की दीवार पर लगाए जाएंगे अर्थात अब बाबा का पूरा मंदिर सोने से जड़ा हुआ होगा।रविवार यानी 27 फरवरी को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ में पूजा की तो पहली बार गर्भगृह स्वर्ण जड़ित होने की तस्वीरें सबके सामने आई। ऐसा बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने सोने से जड़े हुए गर्भगृह में पहली बार जलाभिषेक किया। स्वयं प्रधानमंत्री भी दीवारों और सीलिंग को देखकर आश्चर्य में पड़ गए।

आइए जाने किसने और कब यह गुप्त दान दिया–
शिव के मंदिर में जुड़े हुए कुछ अधिकारियों ने बताया कि शिव को उनके भक्त ने करीब एक महीने पहले ही गुप्त दान किया है। लेकिन भक्त का नाम क्या है, इसके बारे में कोई भी जानकारी सामने नहीं आई है। 10 दिन पहले मंदिर के गर्भगृह को सोने से जड़ने का काम शुरू हुआ था। और अब गर्भगृह में सोने की परत चढ़ाने का काम हो चुका है। महाशिवरात्रि यानी कल 1 मार्च को शिव के भक्तों को मंदिर में सोने के पत्तर देखने को मिलेंगे। अब बाबा विश्वनाथ के धाम की आभा और चमक देखते ही बन रही है।मंदिर बेहद ही शोभामान और अलंकृत ही चुका है जिसे देखते ही कोई भी इसकी सुंदरता में मोहित हो जाए।

आइए जाने क्या रहेगी सुरक्षा व्यवस्था–
बाबा के धाम की आंतरिक सुरक्षा सीआरपीएफ के हवाले में है।वही बाह्य सुरक्षा की बात करे तो वहां यूपी पुलिस और पीएसी के जवान ड्यूटी पर दिन रात तैनात रहते हैं। इनकी ड्यूटी शिफ्ट वाइस लगती है। आपको बता दे पूरे परिसर में जगह-जगह CCTV कैमरे भी लगाए गए हैं। जिससे कोई भी व्यक्ति चाहकर भी मंदिर में लगी सोने की परत को क्षति नहीं पहुंचा सकता है। बाबा के भक्तों को गर्भगृह में लगी स्टील की बैरिकेडिंग से बाहर निकाला जाता है। मुख्यता सावन और महाशिवरात्रि जैसे बड़े पर्वों पर भक्तों की भीड़ के चलते उन्हें मंदिर keb गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया जाता है। बाहर से मन्दिर के झांकी दर्शन और पूजा आदि करने की पूरी व्यवस्था की जाती है। जिससे भक्त बाबा की पूजा से वंचित न रहे।

इससे पहले कब बना था स्वर्ण जड़ित करने का प्लान–
आपको बता दे इससे पहले साल 2012 में भी मंदिर के गर्भगृह को स्वर्ण जड़ित करने की संरचना तैयार की गई था। Us दौरान IIT-BHU के सिविल इंजीनियरों ने गर्भगृह की दीवारों का परीक्षण किया था। परिक्षण के बाद इंजीनियरों का कहना था कि गर्भगृह के दीवारें इतना भार सहन करने योग्य नहीं है। उसके बाद से ही वह योजना वही ठप्प हो गई। लेकिन जब पिछले साल 13 दिसंबर को कॉरिडोर का निर्माण कार्य पूर्ण हुस्न, तब गर्भगृह की दीवारों को मजबूती मिली। और उसके बाद से यह फैसला लिया गया की महाशिवरात्रि से पहले पूरे गर्भगृह को स्वर्ण जड़ित किया जाय। और बाबा की कृपा से शिवरात्रि के पहले यह कार्य पूर्ण भी हो गया है।कल महाशिवरात्रि में बाबा का मंदिर एक विशेष आभा से प्रदीप्त होता हुआ दिखेगा।