धर्म

Ujjain Mahakal: 2 फीट की राखी, सवा लाख लड्डुओं का भोग, ऐसे मनेगा बाबा महाकाल का रक्षाबंधन

Ujjain Mahakal: उज्जैन महाकाल मंदिर में 28 अगस्त को भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को डेढ़ से 2 फीट की विशेष राखी बांधी जाएगी और सवा लाख लड्डुओं का भोग लगेगा।

Ujjain Mahakal: देशभर में रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम और विश्वास के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, लेकिन उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में इस पर्व की शुरुआत एक अनोखी धार्मिक परंपरा के साथ होगी। रक्षाबंधन 2026 के अवसर पर 28 अगस्त की सुबह भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को विशेष राखी अर्पित की जाएगी। इसके बाद भगवान को सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा।

भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को बांधी जाएगी राखी

महाकाल मंदिर (Ujjain Mahakal Mandir) में हर पर्व को विशेष धार्मिक परंपराओं के साथ मनाने की परंपरा रही है। इसी क्रम में रक्षाबंधन 2026 पर भी 28 अगस्त, शुक्रवार को सुबह करीब 4 बजे भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को राखी अर्पित की जाएगी। पुजारी परिवार की महिलाएं अपने हाथों से तैयार की गई विशेष राखी भगवान को बांधेंगी।

मंदिर (Ujjain Mahakal Mandir) में रक्षाबंधन का यह आयोजन शुभ मुहूर्त या भद्रा की स्थिति से अलग परंपरागत रूप से भस्म आरती के बाद किया जाता है। इस बार पंडित ओम गुरु, पंडित राजेश शर्मा और पंडित आकाश शर्मा के परिवार से जुड़ी महिलाएं बाबा महाकाल के लिए विशेष राखी तैयार कर रही हैं।

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डेढ़ से 2 फीट की होगी विशेष राखी| Ujjain Mahakal Mandir

इस बार बाबा महाकाल के लिए तैयार की जा रही राखी अपनी भव्यता के कारण आकर्षण का केंद्र रहेगी। राखी की लंबाई करीब डेढ़ से 2 फीट बताई जा रही है। इसे तैयार करने में रेशम के धागे, कांच वर्क, मोर पंख, रुद्राक्ष और अन्य सजावटी सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।

राखी में भगवान शिव के स्वरूप से जुड़े त्रिनेत्र, ॐ और त्रिपुंड को भी विशेष स्थान दिया गया है। वहीं, भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख और गौ माता को भी इसमें शामिल किया गया है। इस तरह राखी में शैव और वैष्णव दोनों परंपराओं की धार्मिक भावनाओं को दर्शाने का प्रयास किया गया है।

राखी तैयार कर रहीं रागिनी शर्मा के अनुसार, इसे आकर्षक और दिव्य रूप देने के लिए कई तरह की सजावटी सामग्री का प्रयोग किया गया है। पूरी राखी को तैयार करने में लगभग एक दिन का समय लग रहा है।

छह साल में एक बार आता है पुजारी परिवार का क्रम

महाकाल मंदिर में भगवान की सेवा और पूजा-अर्चना के लिए कुल 16 पुजारी परिवार जुड़े हुए हैं। बाबा महाकाल को रक्षाबंधन पर हर साल राखी अर्पित की जाती है, लेकिन इन परिवारों का व्यक्तिगत क्रम छह साल में एक बार आता है।

महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित ओम गुरु के मुताबिक, जब किसी पुजारी परिवार का क्रम आता है तो उस परिवार की महिलाएं अपने हाथों से राखी तैयार कर बाबा महाकाल को अर्पित करती हैं। यह परंपरा परिवारों के लिए धार्मिक आस्था और श्रद्धा का विशेष अवसर होती है।

मंगलगान के बीच तैयार हो रही राखी

बाबा महाकाल के लिए राखी तैयार करने के दौरान पुजारी परिवार की महिलाएं मंगलगान करती हैं। धार्मिक वातावरण के बीच राखी को सजाया जा रहा है। इसमें रेशमी धागों के साथ आभूषण, विशेष वस्त्र और सजावट की दूसरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस पूरी प्रक्रिया में महिलाओं की श्रद्धा और पारंपरिक भावनाएं भी दिखाई देती हैं। यही वजह है कि रक्षाबंधन 2026 का यह आयोजन महाकाल भक्तों के लिए खास महत्व रखता है।

बाबा को राखी, भक्तों को सवा लाख लड्डुओं का प्रसाद

राखी अर्पित करने के बाद बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। मंदिर में इन लड्डुओं को तैयार करने का काम भी शुरू हो चुका है। भोग के बाद लड्डुओं का प्रसाद श्रद्धालुओं के बीच निशुल्क वितरित किया जाएगा।

इस तरह 28 अगस्त को महाकाल मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान के साथ प्रसाद वितरण भी होगा। रक्षाबंधन 2026 पर बाबा महाकाल को राखी बांधने की यह परंपरा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।

महाकाल मंदिर (Ujjain Mahakal Mandir) में मनाया जाने वाला यह पर्व धार्मिक आस्था, पारंपरिक रीति-रिवाज और भक्तिभाव का अनूठा संगम होगा। भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को विशेष राखी अर्पित करने से लेकर सवा लाख लड्डुओं के भोग और प्रसाद वितरण तक, पूरा आयोजन श्रद्धालुओं के लिए यादगार रहने की उम्मीद है।

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