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सीएम पुष्कर धामी का कड़ा संदेश, उत्तराखंड में अतिक्रमण और ‘लैंड जिहाद’ बर्दाश्त नहीं

उत्तराखंड में अतिक्रमण और ‘लैंड जिहाद’ बर्दाश्त नहीं, सीएम पुष्कर धामी ने 10,000 एकड़ भूमि मुक्त कर 600 अवैध ढांचे गिराए। मदरसे, सड़क विकास और देवभूमि की सांस्कृतिक सुरक्षा पर जोर।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने ‘शब्दोत्सव’ कार्यक्रम में स्पष्ट कहा कि राज्य में ‘लैंड जिहाद’ और अतिक्रमण बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक 10,000 एकड़ भूमि अतिक्रमण मुक्त कर दी गई है और 600 अवैध ढांचे गिराए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य का पाठ्यक्रम न पढ़ाने वाले मदरसे 1 जुलाई 2026 के बाद बंद कर दिए जाएंगे।

पुष्कर धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछली सरकारों ने इस दिशा में ध्यान नहीं दिया, जिसके चलते कई पहाड़ी क्षेत्रों पर बाहरी लोग कब्जा कर चुके हैं। सरकारी जमीनों पर हरी-नीली चादरें चढ़ाकर की गई अतिक्रमण की घटनाओं को अब समाप्त किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित ‘धर्मरक्षक धामी’ सत्र में कहा कि संवैधानिक तरीकों से सरकारी जमीनों से अवैध कब्जों को हटाने का काम किया गया। अब तक लगभग 10,000 एकड़ भूमि अतिक्रमण मुक्त की गई और 600 अवैध ढांचे गिराए गए, जिनमें कोई धार्मिक चिन्ह नहीं पाए गए।

पुष्कर धामी ने हरिद्वार में दुनिया की सबसे बड़ी धर्मध्वजा स्थापित करने की तैयारी का भी उल्लेख किया, जो वैश्विक स्तर पर सनातन संस्कृति का प्रतीक बनेगी। धामी ने कहा कि ऐसे मदरसे जहां राज्य का पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाया जा रहा है, उन्हें 1 जुलाई 2026 के बाद बंद किया जाएगा। उनका कहना था कि देवभूमि में कबिलाई मानसिकता को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा और शिक्षा के मंदिर सभी समुदायों को लाभ पहुंचाएंगे।

पुष्कर धामी ने चारधाम और अन्य धार्मिक क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली–देहरादून एलिवेटेड रोड का निर्माण जल्द पूरा होगा। इसके बाद लोग सड़क मार्ग से दिल्ली से देहरादून तेज़ी से पहुँच सकेंगे। बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए रिंग रोड का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।

कार्यक्रम में आरएसएस के राष्ट्र कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य ने भारत की विशिष्टता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जिसकी संस्कृति विविधताओं को स्वीकार करती है और यह कभी केवल कृषि प्रधान देश नहीं रहा, बल्कि हमेशा उद्योग प्रधान भी रहा है। डॉ. वैद्य ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर चिंता जताते हुए कहा कि आज की शिक्षा बेरोज़गार युवाओं को तैयार कर रही है।

पुष्कर धामी ने कहा कि जेनरेशन जेड युवा आशावादी हैं और अपने लक्ष्य को पूरा करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे युवाओं को उपदेश देने के बजाय संवाद और प्रश्नों के माध्यम से सोचने का अवसर देना चाहिए।

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