Puri Jagannath Rath Yatra 2026: जगन्नाथ मंदिर का अनोखा रहस्य, एकादशी माता को उलटा लटकाने की क्या है मान्यता?
पुरी जगन्नाथ मंदिर में एकादशी के दिन चावल का भोग क्यों लगता है? जानिए इस परंपरा से जुड़ी रोचक कथा
पुरी जगन्नाथ मंदिर के रहस्य में एकादशी माता को उलटा लटकाने की कथा और एकादशी के दिन चावल का भोग लगाने की अनोखी परंपरा जानें।
जगन्नाथ मंदिर: ओडिशा के पवित्र शहर पुरी में इन दिनों भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथ यात्रा 2026 की तैयारियां जोरों पर हैं। हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकलने वाली इस भव्य यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी।
भगवान जगन्नाथ मंदिर भारत के चार धामों में शामिल है और अपनी धार्मिक मान्यताओं व रहस्यों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस मंदिर से जुड़ी कई ऐसी परंपराएं हैं, जो भक्तों को आश्चर्यचकित करती हैं। इन्हीं में से एक है एकादशी माता से जुड़ा रहस्य, जिसके अनुसार मंदिर परिसर में एकादशी माता को उलटा लटकाया गया है।
एकादशी के दिन पुरी में लगता है चावल का भोग
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन कई लोग अनाज, खासतौर पर चावल का सेवन नहीं करते हैं। लेकिन पुरी जगन्नाथ मंदिर में इस दिन भगवान को चावल का भोग लगाया जाता है और भक्तों को भी महाप्रसाद के रूप में चावल दिया जाता है।
मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद सभी नियमों और व्रतों से ऊपर है। यहां श्रद्धालु एकादशी के दिन भी प्रसाद को भगवान का आशीर्वाद मानकर ग्रहण करते हैं।
एकादशी माता से जुड़ी है खास पौराणिक कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस परंपरा के पीछे एक विशेष कथा जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि एक बार ब्रह्मा जी भगवान जगन्नाथ के दर्शन और महाप्रसाद ग्रहण करने के लिए पुरी पहुंचे थे।
जब ब्रह्मा जी मंदिर पहुंचे तो महाप्रसाद समाप्त हो चुका था। उस समय एक पत्ते पर कुछ चावल के दाने बचे हुए थे, जिन्हें एक कुत्ता खा रहा था। भगवान की भक्ति में लीन ब्रह्मा जी ने बिना किसी भेदभाव के उसी कुत्ते के साथ बैठकर चावल ग्रहण कर लिए।
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भगवान जगन्नाथ ने भक्ति को बताया सबसे बड़ा नियम
कथा के अनुसार, उसी समय एकादशी माता वहां प्रकट हुईं और उन्होंने ब्रह्मा जी से कहा कि आज एकादशी है और चावल खाना नियमों के विरुद्ध है।
तभी भगवान जगन्नाथ वहां आए और उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति और भगवान के प्रति प्रेम सबसे बड़ा है। उन्होंने बताया कि उनके धाम का महाप्रसाद किसी भी तिथि और नियम के बंधन से मुक्त रहेगा।
एकादशी माता को उलटा लटकाने की मान्यता
लोक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ ने एकादशी माता को मंदिर के पीछे उलटा लटका दिया। इसके बाद से पुरी धाम में एकादशी के दिन चावल खाने और भगवान को चावल का भोग लगाने की परंपरा शुरू हुई।
भक्तों का मानना है कि पुरी जगन्नाथ मंदिर में यह परंपरा केवल एक धार्मिक रीति नहीं है, बल्कि यह संदेश देती है कि भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा और भक्ति सबसे महत्वपूर्ण है।
जगन्नाथ धाम के रहस्य करते हैं आकर्षित
पुरी जगन्नाथ मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं, महाप्रसाद और धार्मिक मान्यताओं के कारण दुनियाभर के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। रथ यात्रा के समय यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और लोग भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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