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दिल्ली विधानसभा में चौथे दिन भी हंगामा, शीतकालीन सत्र एक दिन बढ़ाया गया

दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र में चौथे दिन भी भारी हंगामा रहा। आप-भाजपा टकराव के बीच सत्र एक दिन के लिए बढ़ाया गया, आतिशी की गैरहाजिरी पर सवाल।

दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र लगातार राजनीतिक टकराव की भेंट चढ़ता जा रहा है। चौथे दिन भी सदन में भारी शोर-शराबा और आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिला। हालात इतने बिगड़ गए कि विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही चार बार स्थगित करनी पड़ी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्पीकर ने सत्र को एक दिन के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। अब विधानसभा शुक्रवार को भी बैठेगी।

सदन में नहीं थमा शोर, कार्यवाही बार-बार बाधित

सत्र की शुरुआत से ही भाजपा और आम आदमी पार्टी के विधायकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते नजर आए। नारेबाजी और हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल पाई। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कई बार सदस्यों से संयम बरतने की अपील की, लेकिन हालात में सुधार नहीं हुआ।

करीब आधे घंटे तक सदन को स्थगित करना पड़ा। कार्यवाही दोबारा शुरू होते ही फिर वही स्थिति बनी रही। इस कारण अध्यक्ष को सत्र बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ा।

वायरल वीडियो विवाद पर फोरेंसिक जांच के आदेश

आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि एक मंत्री द्वारा नेता प्रतिपक्ष के बयान से छेड़छाड़ कर फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। विपक्ष ने इसे सदन की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पीकर ने विधानसभा सचिवालय को वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच कराने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सौंपी जाएगी। इसके साथ ही वीडियो और बयान से जुड़े मामले को विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया गया है।

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नेता प्रतिपक्ष की गैरहाजिरी पर स्पीकर नाराज़

सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष आतिशी लगातार दूसरे दिन सदन में उपस्थित नहीं रहीं। इसे लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने नाराजगी जताई और स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए। उन्होंने संकेत दिए कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

अहम मुद्दों पर नहीं हो सकी चर्चा

चार दिनों के सत्र में प्रदूषण, शिक्षा, प्रशासन और वित्त जैसे अहम मुद्दों पर कोई ठोस चर्चा नहीं हो पाई। अब तक केवल एक विधेयक ही पारित हो सका है। मुख्यमंत्री द्वारा पेश की जाने वाली कैग रिपोर्ट भी हंगामे के चलते सदन में नहीं रखी जा सकी।

विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक टकराव के कारण जनता से जुड़े मुद्दे लगातार पीछे छूट रहे हैं, जबकि विधानसभा पर लाखों रुपये का खर्च हो रहा है।

 कपिल मिश्रा और सौरभ भारद्वाज के बयान से बढ़ी सियासी गर्मी

कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने नेता प्रतिपक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे सवालों से बचने के लिए सदन से दूरी बना रही हैं। वहीं आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने भाजपा पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया और कार्रवाई की मांग की।

 शुक्रवार की कार्यवाही पर टिकी निगाहें

अब सबकी नजर शुक्रवार की कार्यवाही पर है। सवाल यह है कि क्या सदन में कोई सार्थक बहस हो पाएगी या फिर राजनीतिक हंगामा ही हावी रहेगा। फिलहाल दिल्ली की जनता को ठोस फैसलों का इंतजार बना हुआ है।

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