3 साल की पीड़िता के मेडिकल परीक्षण में देरी पर विवाद, जांच प्रक्रिया पर सवाल। सौरभ भारद्वाज ने निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय की मांग की।
दिल्ली में एक 3 वर्षीय पीड़िता से जुड़े संवेदनशील मामले में मेडिकल परीक्षण में कथित देरी को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि AIIMS में पुलिस द्वारा आवश्यक मेडिकल जांच प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं कराई गई, जिससे पूरे मामले की जांच की गति और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों और परिजनों के अनुसार, मेडिकल परीक्षण में देरी को लेकर लगातार चिंता बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में समय पर मेडिकल जांच बेहद जरूरी होती है, ताकि सबूत सुरक्षित रह सकें और न्याय प्रक्रिया प्रभावित न हो।
परिजनों ने जताई चिंता, जांच पर असर की आशंका
पीड़िता के परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल परीक्षण में हो रही देरी से जांच की दिशा प्रभावित हो सकती है। उनका मानना है कि इस तरह की लापरवाही से न केवल सबूतों पर असर पड़ सकता है, बल्कि न्याय मिलने में भी अनावश्यक देरी हो सकती है।
Why is Police not ready for Medical Examination of 3 yo victim at AIIMS ?
Who is saving the 57 yo accused Lalit Kumar a senior official of SS Mota Singh School ?
Why should every victim get justice after social media uproar ? pic.twitter.com/EVqL3Idjr2
— Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) May 26, 2026
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मामले में आरोपी के रूप में 57 वर्षीय ललित कुमार का नाम सामने आने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। आरोप है कि वह एसएस मोटा सिंह स्कूल से जुड़े एक वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और जांच एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।
जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने जांच व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में किसी भी तरह की देरी स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए और प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर तेज किया जाना चाहिए।
सौरभ भारद्वाज की प्रतिक्रिया
इस मामले पर आम आदमी पार्टी के नेता Saurabh Bharadwaj ने चिंता व्यक्त करते हुए निष्पक्ष और तेज जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय मिलना चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय प्रक्रिया पर भरोसा बना रहे।
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