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यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 6 महीने बढ़ा, 57 हजार से अधिक पंचायतों में प्रधान बनेंगे प्रशासक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के बाद आदेश जारी, चुनाव में देरी के चलते मौजूदा प्रधानों को दी गई अतिरिक्त जिम्मेदारी

यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 6 महीने बढ़ा, 57 हजार पंचायतों में प्रधान प्रशासक बनेंगे। योगी सरकार ने विकास कार्य जारी रखने का आदेश जारी किया।

यूपी सरकार ने ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की मंजूरी के बाद यह आदेश जारी किया गया। अब राज्य की 57,694 से अधिक ग्राम पंचायतों में निवर्तमान प्रधान ही प्रशासक के रूप में काम करेंगे।

यह निर्णय पंचायत चुनाव में हो रही देरी और आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने में लगने वाले समय को देखते हुए लिया गया है।

विकास कार्यों को जारी रखने के लिए लिया गया फैसला

यूपी सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य गांवों में विकास कार्यों को बिना किसी रुकावट के जारी रखना है। अब ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, मनरेगा कार्य, सड़क मरम्मत और अन्य जरूरी योजनाएं प्रभावित नहीं होंगी।

पंचायती राज मंत्री के निर्देश के बाद प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार द्वारा सोमवार को आधिकारिक आदेश जारी किया गया।

57 हजार से अधिक पंचायतों में प्रशासनिक जिम्मेदारी

आदेश के अनुसार, बुधवार से पूरे प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक की भूमिका सौंपी जाएगी। हालांकि, वे केवल सामान्य और रूटीन कार्य ही कर सकेंगे। किसी भी बड़े नीति निर्णय के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी और जिलाधिकारी की अनुमति अनिवार्य होगी।

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इस व्यवस्था के तहत जिला स्तर पर निगरानी भी मजबूत की जाएगी ताकि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे।

आरक्षण प्रक्रिया में देरी बनी वजह

यूपी सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि पंचायत चुनावों के लिए पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। इसके लिए गठित समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग को जिलों में जाकर जनसंख्या के आंकड़े जुटाने और रिपोर्ट तैयार करने में समय लग रहा है।

नियमों के अनुसार, किसी भी क्षेत्र में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता, भले ही आबादी अधिक हो।

आगे भी बढ़ सकता है प्रशासक व्यवस्था का दायरा

प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है, जबकि क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल 19 जुलाई और जिला पंचायतों का 11 जुलाई को खत्म होगा। ऐसे में संभावना है कि आने वाले समय में इन संस्थाओं में भी प्रशासक नियुक्त किए जा सकते हैं।

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