राज्यगुजरात

सुरेंद्रनगर में किसानों पर अत्याचार का आरोप: इसुदान गढ़वी ने सरकार और कंपनियों पर साधा निशाना

सुरेंद्रनगर में किसानों पर अत्याचार के आरोपों को लेकर इसुदान गढ़वी ने सरकार और कंपनियों पर गंभीर सवाल उठाए और उचित मुआवजे की मांग की।

सुरेंद्रनगर जिले के कोंढ गांव में किसानों के साथ कथित अत्याचार को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए सरकार और निजी कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

किसानों पर अत्याचार को बताया असहनीय

इसुदान गढ़वी ने कहा कि सुरेंद्रनगर के कोंढ गांव में किसानों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया है, वह किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान की जमीन पर जबरन खंभे और पवनचक्कियां लगाई जा रही हैं, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।

इस पूरे मामले को लेकर सुरेंद्रनगर में किसानों का विरोध प्रदर्शन चर्चा में आ गया है।

कंपनियों और प्रशासन पर गंभीर आरोप

AAP नेता ने आरोप लगाया कि पवनचक्की और बिजली खंभों के प्रोजेक्ट से कंपनियों के साथ-साथ कुछ नेता और अधिकारी भी लाभ कमा रहे हैं, जबकि असली मालिक यानी किसान को उचित हिस्सा नहीं मिल रहा।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब कंपनियां करोड़ों कमा रही हैं तो किसानों को उस मुनाफे में हिस्सा क्यों नहीं दिया जाता।

किसानों के लिए मुआवजे की मांग

इसुदान गढ़वी ने मांग की कि किसानों को कंपनियों की आय में नियमित हिस्सा मिलना चाहिए या फिर जमीन के उपयोग के बदले उचित और स्थायी मुआवजा तय किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसानों को केवल आश्वासन देकर नहीं छोड़ा जा सकता, उन्हें न्याय और आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।

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“किसान एकजुट हों तो सत्ता बदल सकती है”

AAP नेता ने कहा कि यदि किसान एकजुट होकर वोट करें तो किसी भी सरकार को सत्ता में आने से रोका जा सकता है, लेकिन किसानों के बंटे होने का फायदा राजनीतिक दल उठाते हैं।

इसुदान गढ़वी ने किसानों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की अपील की।

भाजपा पर भी निशाना

उन्होंने आरोप लगाया कि जहां-जहां भाजपा को समर्थन मिला है, वहां किसानों की जमीन पर ज्यादा दबाव और परियोजनाएं देखी जा रही हैं।

इसुदान गढ़वी ने यह भी कहा कि कई क्षेत्रों में किसान आत्महत्या जैसे गंभीर हालात का सामना कर रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है।

सरकार से प्रतिनिधिमंडल बनाने की मांग

उन्होंने सरकार से अपील की कि कच्छ से लेकर जामनगर और सुरेंद्रनगर तक किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल बनाकर बातचीत की जाए ताकि सभी मामलों का समाधान निकाला जा सके और उचित मुआवजा तय किया जाए।

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