प्रवेशोत्सव केवल एक दिन का कार्यक्रम बनकर रह गया है: डॉ. करन बारोट AAP
- कक्षा 1 में बच्चे का एडमिशन करवाकर उसके फोटो, वीडियो और रील बनाकर वायरल किए जाते हैं, लेकिन क्या वही बच्चे कक्षा 10 तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करके पहुंचते हैं या नहीं?: डॉ. करन बारोट AAP
- वाइब्रेंट गुजरात की बात हम करते हैं, लेकिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घट रही है: डॉ. करन बारोट AAP
- शिक्षा का बजट बढ़ रहा है लेकिन बच्चों की संख्या नहीं बढ़ रही, गुजरात के बच्चों को जो गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलनी चाहिए, वह गुणवत्ता नहीं मिल रही है: डॉ. करन बारोट AAP
आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री और प्रदेश मुख्य प्रवक्ता डॉ. करन बारोट ने एक वीडियो के माध्यम से गंभीर मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि सरकार द्वारा 23, 24 और 25 तारीख को स्कूल प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी कार्यक्रम आयोजित किया जाने वाला है। कक्षा 1 में बच्चे का एडमिशन करवाकर उसके फोटो, वीडियो और रील बनाकर वायरल किए जाते हैं, लेकिन क्या वही बच्चे कक्षा 10 तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करके पहुंचते हैं या नहीं, क्या इसकी निगरानी सरकार द्वारा की जाती है या नहीं, यह बहुत बड़ा सवाल है। क्योंकि आप प्रवेश तो दिलवाते हैं, लेकिन अच्छी शिक्षा की गुणवत्ता, नियमित उपस्थिति, अच्छे परिणाम, स्कूल में अच्छे कमरे हैं या नहीं, शिक्षक हैं या नहीं, शौचालय हैं या नहीं, इसकी निगरानी सरकार नहीं करती। प्रवेशोत्सव केवल एक दिन का कार्यक्रम बनकर रह गया है।
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आगे मुख्य प्रवक्ता डॉ. करन बारोट ने कहा कि माध्यमिक विद्यालयों में ड्रॉपआउट रेशियो 16.9% है, सेकेंडरी स्तर पर ड्रॉपआउट रेशियो 20 प्रतिशत है, आदिवासी क्षेत्रों में ड्रॉपआउट रेशियो 20 प्रतिशत से अधिक है। इसका मतलब है कि इतने वर्षों से आपकी सरकार होने के बावजूद आदिवासी विद्यार्थी शिक्षा से वंचित हैं। सरकार को यह देखना चाहिए कि ग्रामीण क्षेत्रों और गरीब परिवारों के लोग कक्षा 9 और 10 के बाद बड़ी संख्या में पढ़ाई छोड़ रहे हैं और रोजगार तथा मजदूरी की ओर जा रहे हैं। इसका प्रभाव गुजरात पर पड़ने वाला है। ज्ञान शक्ति, नमो लक्ष्मी, नमो सरस्वती जैसी योजनाएं सरकार ने शुरू कीं, लेकिन क्या वे योजनाएं जमीन तक पहुंची हैं या नहीं, इसकी जांच सरकार को करनी चाहिए। हम वाइब्रेंट गुजरात की बात करते हैं, लेकिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घट रही है, ड्रॉपआउट रेशियो बढ़ रहा है, शिक्षा का बजट बढ़ रहा है लेकिन बच्चों की संख्या नहीं बढ़ रही। गुजरात के बच्चों को जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए, वह गुणवत्ता उन्हें नहीं मिल रही है।
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