AAP सांसद संजय सिंह ने NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली और छात्र प्रदर्शन पर राज्यसभा में नियम 267 के तहत चर्चा की मांग की।
संसद के मानसून सत्र के दौरान NEET-UG 2026 पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने नियम 267 के तहत कार्यवाही स्थगित कर इस मामले पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की है। वहीं लोकसभा में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और मणिकम टैगोर ने भी अलग-अलग मुद्दों पर स्थगन प्रस्ताव देकर सरकार से जवाब मांगा है।
संजय सिंह ने नियम 267 के तहत दिया नोटिस
संजय सिंह ने राज्यसभा के महासचिव को भेजे नोटिस में कहा कि सदन की सामान्य कार्यवाही रोककर NEET-UG प्रश्नपत्र लीक, सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की कथित विफलता, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए।
उन्होंने कहा कि यह विषय करोड़ों छात्रों और उनके परिवारों से जुड़ा है तथा राष्ट्रीय महत्व का मामला है।
परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल
अपने नोटिस में संजय सिंह ने आरोप लगाया कि NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करनी पड़ी, जिससे लाखों विद्यार्थियों को मानसिक और शैक्षणिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने दावा किया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने देश की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा
लोकसभा में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने स्थगन प्रस्ताव देकर नए दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) पर चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर राजनीतिक दल बदल की घटनाओं को रोकने के लिए मौजूदा कानून में सुधार की आवश्यकता है।
वहीं कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने NEET-UG और UGC-NET परीक्षा से जुड़े कथित अनियमितताओं, छात्रों के भविष्य और दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए अलग से स्थगन प्रस्ताव पेश किया।
विपक्ष ने छात्रों के मुद्दे को संसद में उठाया
विपक्षी दलों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, छात्रों की सुरक्षा और उनकी मेहनत का सम्मान सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उनका तर्क है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो संसद में इस पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
अब यह फैसला सदन के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष के स्तर पर होगा कि इन नोटिसों और स्थगन प्रस्तावों को स्वीकार कर चर्चा कराई जाती है या नहीं।
मानसून सत्र के दौरान NEET-UG विवाद, परीक्षा सुधार, छात्र हित और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
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