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सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट, गोल्ड ₹1.42 लाख पर आया, चांदी ₹2,400 सस्ती; जानें खरीदारों और निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत

MCX और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी के बीच सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। जानिए डॉलर, फेडरल रिजर्व और वैश्विक बाजार के असर से आगे क्या हो सकती है निवेश रणनीति।

सोना ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम पर आया, चांदी ₹2,400 सस्ती हुई। जानें कीमतों में गिरावट की वजह, निवेशकों और खरीदारों के लिए इसका क्या मतलब है।

भारत में शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट तक दोनों कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में मजबूती की वापसी और हालिया तेजी के बाद हुई मुनाफावसूली इसकी प्रमुख वजह रही। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि लंबी अवधि में सोने को अभी भी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव से समर्थन मिल सकता है।

MCX पर सोना और चांदी दोनों फिसले

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना करीब 0.79% की गिरावट के साथ ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। वहीं, 4 सितंबर डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव ₹2,400 यानी लगभग 1% टूटकर ₹2.18 लाख प्रति किलोग्राम से नीचे आ गया।

यह गिरावट ऐसे समय आई है जब पिछले कुछ दिनों में दोनों धातुओं ने मजबूत तेजी दर्ज की थी।

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखी कमजोरी

वैश्विक बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। COMEX पर गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स दोनों में गिरावट दर्ज की गई। पिछले कारोबारी सत्र में ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे कीमतें नीचे आ गईं।

सोने-चांदी की कीमतें क्यों घटीं?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर में मजबूती लौटने से कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव बना। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तब अन्य मुद्राओं में सोना और चांदी महंगे हो जाते हैं, जिससे उनकी मांग प्रभावित होती है।

इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रखने के बाद आई तेजी में निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बाजार में गिरावट देखने को मिली।

गिरावट के बावजूद क्यों मजबूत बना हुआ है सोना?

हालिया कमजोरी के बावजूद बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोना अभी भी मजबूत आधार पर बना हुआ है। इसकी वजहें हैं—

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने की बढ़ती मांग
भविष्य में ब्याज दरों में नरमी की संभावनाएं

इन कारणों से निवेशकों का भरोसा अभी भी सोने पर बना हुआ है।

भारतीय खरीदारों के लिए इसका क्या मतलब है?

भारत में सोने और चांदी की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार से ही तय नहीं होतीं, बल्कि डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क और घरेलू मांग का भी बड़ा असर पड़ता है।

हाल की गिरावट उन लोगों के लिए राहत मानी जा रही है जो शादी, त्योहार या निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं। हालांकि कीमतों में उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है।

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