पंजाब में 2027 चुनाव से पहले BJP-SAD गठबंधन की अटकलें तेज हैं। केजरीवाल ने मोदी-बादल मुलाकात के बाद दोनों दलों पर तंज कसा।
पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच संभावित नजदीकी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के बीच मुलाकात की खबरों के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दोनों दलों के संभावित गठजोड़ पर तंज कसा है।
केजरीवाल की टिप्पणी के बाद पंजाब में बीजेपी-शिअद गठबंधन की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। हालांकि, दोनों दलों की ओर से फिलहाल किसी नए गठबंधन की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
केजरीवाल ने किस बात पर कसा तंज?
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए BJP और SAD के पुराने रिश्तों का हवाला देते हुए तंज किया। उन्होंने सवालिया अंदाज में पूछा कि क्या दोनों दल फिर से साथ आने की तैयारी कर रहे हैं।
केजरीवाल की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात को लेकर पंजाब के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं चल रही हैं। इसी वजह से बीजेपी-शिअद गठबंधन की संभावना एक बार फिर बहस का विषय बन गई है।
BJP पहले कर चुकी है अकेले चुनाव लड़ने की बात
हालांकि, BJP पहले ही SAD के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार कर चुकी है। जून में पंजाब BJP की बैठक के बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा था कि पार्टी का मुख्य एजेंडा पंजाब का विकास है और फिलहाल गठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है।
BJP की ओर से पंजाब में संगठन को मजबूत करने और अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरने की बात कही जाती रही है। पार्टी नेतृत्व राज्य में अपना जनाधार बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है।
ऐसे में मौजूदा समय में बीजेपी-शिअद गठबंधन को लेकर सामने आ रही चर्चाओं को आधिकारिक राजनीतिक फैसला नहीं माना जा सकता।
BJP और अकाली दल का रहा है पुराना गठबंधन
BJP और SAD का पंजाब की राजनीति में लंबा गठबंधन रहा है। दोनों दलों ने राज्य में मिलकर सरकार भी बनाई थी और कई चुनावों में एक साथ चुनाव लड़ा।
हालांकि, तीन कृषि कानूनों को लेकर हुए किसान आंदोलन के दौरान दोनों दलों के रिश्तों में बड़ा बदलाव आया। SAD ने 2021 में कृषि कानूनों के विरोध के बीच NDA से अलग होने का फैसला किया था। इसके बाद दोनों पार्टियां अलग-अलग राजनीतिक रास्ते पर आगे बढ़ीं।
अब 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ पुराने राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो रही हैं।
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2022 में AAP ने दर्ज की थी बड़ी जीत
पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 117 में से 92 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं SAD को तीन और BJP को दो विधानसभा सीटों पर सफलता मिली थी।
आगामी चुनाव में सभी प्रमुख दल अपने संगठन और राजनीतिक आधार को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में यदि भविष्य में बीजेपी-शिअद गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक फैसला होता है, तो इसका पंजाब के चुनावी समीकरणों पर असर पड़ सकता है।
कांग्रेस ने BJP-AAP पर लगाया मिलीभगत का आरोप
इस बीच पंजाब कांग्रेस भी राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने BJP और AAP पर आपसी मिलीभगत का आरोप लगाया है।
उन्होंने कांग्रेस के बूथ स्तर के संगठन को मजबूत करने की बात कहते हुए कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने की अपील की। कांग्रेस का दावा है कि आगामी चुनाव को देखते हुए पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी तैयारियों को तेज कर रही है।
2027 से पहले क्या बदलेगा पंजाब का सियासी समीकरण?
पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है और उससे पहले राजनीतिक दलों के बीच संभावित गठजोड़ पर चर्चा स्वाभाविक रूप से तेज हो गई है। BJP और SAD के बीच पुराने संबंध, दोनों नेताओं की मुलाकात और केजरीवाल की टिप्पणी ने बीजेपी-शिअद गठबंधन की अटकलों को नया आधार दिया है।
फिलहाल BJP की ओर से अकेले चुनाव लड़ने की पुरानी स्थिति कायम है और किसी नए गठबंधन की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए बीजेपी-शिअद गठबंधन को लेकर अंतिम तस्वीर सामने आने में अभी समय लग सकता है।
पंजाब की राजनीति में आने वाले महीनों में होने वाली बैठकों, बयानों और संगठनात्मक गतिविधियों से यह स्पष्ट हो सकता है कि 2027 के चुनाव में BJP और SAD अलग-अलग मैदान में उतरेंगे या फिर पुराने राजनीतिक रिश्ते किसी नए रूप में वापस आएंगे।
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