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पंजाब में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगी मान सरकार, मरीजों के अधिकारों की होगी बेहतर सुरक्षा

पंजाब में मान सरकार मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर रही है। SMHA और जिला मानसिक स्वास्थ्य बोर्ड मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा करेंगे।

पंजाब में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और मरीजों के अधिकारों को सुरक्षित बनाने की दिशा में मान सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी (SMHA) को मजबूत करने पर जोर दे रही है, ताकि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं की निगरानी और नियमन बेहतर तरीके से किया जा सके।

सरकार के इस प्रयास का उद्देश्य मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों के साथ-साथ नशे की समस्या से प्रभावित व्यक्तियों को भी बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

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जिला स्तर पर बनेंगे मेंटल हेल्थ रिव्यू बोर्ड

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जिला स्तर पर मेंटल हेल्थ रिव्यू बोर्ड की भूमिका को मजबूत किया जाएगा। ये बोर्ड मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों के दाखिले, इलाज से जुड़े फैसलों, शिकायतों और अधिकारों के उल्लंघन जैसे मामलों की समीक्षा कर सकेंगे।

इससे मरीजों और उनके परिवारों को अपनी समस्याएं सामने रखने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था मिलने की उम्मीद है। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

SMHA में बढ़ेगी विभिन्न वर्गों की भागीदारी

मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक व्यापक और संवेदनशील बनाने के लिए स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसमें मनोचिकित्सकों के साथ मानसिक बीमारी से प्रभावित व्यक्ति, उनके देखभालकर्ता, गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और अन्य संबंधित पक्ष शामिल किए जाएंगे।

सरकार का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी नीतियों और सेवाओं में मरीजों तथा उनके परिवारों की आवाज शामिल होने से व्यवस्था अधिक व्यावहारिक और जन-केंद्रित बन सकती है।

मरीजों के अधिकारों पर रहेगा फोकस

नई व्यवस्था में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं लेने वाले लोगों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। खास तौर पर इलाज, अस्पताल में भर्ती, शिकायतों और अधिकारों से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए संस्थागत व्यवस्था मजबूत की जाएगी।

मान सरकार के इस प्रयास से पंजाब में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी बेहतर होने के साथ मरीजों को सम्मानजनक और अधिकार-आधारित देखभाल उपलब्ध कराने की दिशा में मजबूती आने की उम्मीद है।

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