हरियाणा में चीनी के दाम करीब 45% बढ़े हैं। खुदरा कीमत 62-65 रुपये किलो तक पहुंची, जिससे त्योहारों से पहले आम लोगों की जेब पर असर पड़ा है।
हरियाणा में त्योहारों और शादियों के सीजन से पहले आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ता नजर आ रहा है। हरियाणा में बढ़े चीनी के रेट ने घरों से लेकर दुकानदारों और मिठाई कारोबारियों तक की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब डेढ़ महीने में चीनी की खुदरा कीमतों में लगभग 45 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी बताई जा रही है। पहले जहां चीनी 42 से 45 रुपये प्रति किलो के आसपास मिल रही थी, वहीं अब कई खुदरा दुकानों पर इसकी कीमत 62 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
डेढ़ महीने में करीब 45 प्रतिशत बढ़ी कीमत
चीनी के दाम में अचानक आए इस उछाल का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है। त्योहारों के दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में मिठाई, खीर, हलवा और अन्य पकवान बनाने वाले परिवारों को अब पहले के मुकाबले ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। हरियाणा में बढ़े चीनी के रेट का असर खास तौर पर उन परिवारों पर पड़ सकता है, जिनके घरों में त्योहार या शादी की तैयारियां चल रही हैं।
गन्ने की पैदावार और उत्पादन पर असर
चीनी कारोबारियों और उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक कीमत बढ़ने के पीछे कई वजहें हैं। बारिश और प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण कुछ क्षेत्रों में गन्ने की पैदावार प्रभावित हुई है। इसके अलावा गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने से चीनी उत्पादन पर भी असर पड़ने की बात कही जा रही है।
कारोबारियों का कहना है कि गन्ने की फसल का लंबा चक्र और किसानों को भुगतान मिलने में होने वाली देरी भी एक बड़ी चुनौती है। इन कारणों से कुछ किसान दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे गन्ने के रकबे में कमी आने की आशंका जताई जा रही है।
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मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा- सरकार की भूमिका नहीं
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर हरियाणा के कैबिनेट मंत्री रणबीर सिंह गंगवा से पानीपत में सवाल किया गया। ग्रीवेंस कमेटी की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी मांग और आपूर्ति से जुड़ा बाजार का मामला है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि कीमतों में इस बदलाव में सरकार की कोई भूमिका नहीं है। उनके मुताबिक बाजार में मांग और उपलब्धता के आधार पर कीमतों में उतार-चढ़ाव होता रहता है। हरियाणा में बढ़े चीनी के रेट को लेकर सरकार की ओर से इसी बाजार स्थिति को वजह बताया गया है।
चाय से लेकर मिठाई तक महंगाई का असर
चीनी महंगी होने का असर केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं है। चाय की दुकानों, होटल और रेस्तरां के कारोबार पर भी लागत बढ़ने का दबाव है। कई चाय दुकानदारों का कहना है कि चीनी समेत अन्य सामान महंगे होने के कारण उन्हें कीमतों में बदलाव पर विचार करना पड़ रहा है।
वहीं, मिठाई कारोबारियों के सामने भी लागत बढ़ने की चुनौती है। स्थानीय हलवाई संगठनों के अनुसार यदि चीनी की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में मिठाइयों के दाम करीब 20 से 30 रुपये प्रति किलो तक बढ़ सकते हैं। त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग बढ़ने से इसका असर ग्राहकों की जेब पर और ज्यादा पड़ सकता है।
75 रुपये किलो तक पहुंचने की आशंका
कारोबारियों ने यह भी आशंका जताई है कि अगर बाजार में चीनी की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो आने वाले हफ्तों में इसकी कीमत 75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह भविष्य की बाजार स्थिति पर निर्भर करेगा और कीमतों में आगे कितना बदलाव होगा, यह मांग, आपूर्ति और उत्पादन की स्थिति से तय होगा।
फिलहाल हरियाणा में बढ़े चीनी के रेट ने त्योहारों से पहले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अगर कीमतों में जल्द गिरावट नहीं आती है, तो इसका असर घरेलू खर्च के साथ-साथ चाय, मिठाई और खाद्य कारोबार की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। त्योहारों के सीजन में बढ़ती मांग के बीच अब उपभोक्ताओं की नजर चीनी की कीमतों में संभावित राहत पर टिकी है।
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