राज्यदिल्ली

भावनगर लट्ठाकांड पर अरविंद केजरीवाल का हमला, शराबबंदी को लेकर सरकार पर उठाए सवाल

भावनगर लट्ठाकांड पर अरविंद केजरीवाल ने गुजरात सरकार पर हमला बोला। जहरीली नकली शराब से हुई मौतों के बाद शराबबंदी को लेकर सवाल उठे।

गुजरात के भावनगर जिले में कथित जहरीली नकली शराब से हुई मौतों के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। भावनगर लट्ठाकांड को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने राज्य में लागू शराबबंदी के बावजूद जहरीली शराब की घटनाओं को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

भावनगर में नकली शराब के सेवन से कई लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, मामले में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ी और 20 अगस्त तक अलग-अलग रिपोर्टों में यह आंकड़ा 9 से 10 तक बताया गया।

केजरीवाल ने शराबबंदी को लेकर साधा निशाना

भावनगर लट्ठाकांड के बाद अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए गुजरात में शराबबंदी के प्रभावी अमल पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब राज्य में शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध है, तब जहरीली शराब के कारण लोगों की जान जाना गंभीर चिंता का विषय है।

केजरीवाल ने अपने बयान में भाजपा के लंबे शासन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि गुजरात में अवैध शराब का कारोबार बढ़ा है। उन्होंने महात्मा गांधी की भूमि गुजरात में बार-बार सामने आने वाली ऐसी घटनाओं को लेकर भी सवाल उठाए।

जहरीली शराब से बिगड़ी लोगों की तबीयत

भावनगर लट्ठाकांड की शुरुआती जांच में नकली शराब में जहरीले रसायन की मौजूदगी की बात सामने आई है। गुजरात पुलिस की स्टेट मॉनिटरिंग सेल ने मामले की जांच अपने हाथ में लेकर कार्रवाई तेज की है। पुलिस के मुताबिक नकली शराब में मि‍थेनाॅल की खतरनाक मात्रा पाए जाने की जानकारी सामने आई है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक जब्त की गई एक बोतल में 38.59 प्रतिशत मि‍थेनाॅल और सिर्फ 0.94 प्रतिशत इथेनाॅल पाया गया। इससे जांच एजेंसियों के सामने नकली शराब तैयार करने और उसकी सप्लाई से जुड़े नेटवर्क की जांच अहम हो गई है।

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जांच में कई आरोपी गिरफ्तार

भावनगर लट्ठाकांड की जांच के दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई संदिग्धों को पकड़ा है। 20 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक स्टेट मॉनिटरिंग सेल ने 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जबकि कुल 21 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई।

जांच एजेंसियां नकली शराब तैयार करने, कच्चा माल जुटाने और उसे अलग-अलग इलाकों तक पहुंचाने वाले नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य इस पूरे अवैध कारोबार से जुड़े लोगों तक पहुंचना है।

गुजरात में शराबबंदी पर फिर उठे सवाल

गुजरात में शराब की बिक्री और सेवन पर कानूनी प्रतिबंध है। इसके बावजूद अवैध शराब से जुड़ी घटनाएं सामने आने पर शराबबंदी के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भावनगर लट्ठाकांड ने एक बार फिर इसी मुद्दे को केंद्र में ला दिया है।

विपक्ष सरकार से यह सवाल कर रहा है कि शराबबंदी वाले राज्य में नकली और जहरीली शराब का नेटवर्क कैसे सक्रिय रहा। दूसरी ओर, जांच एजेंसियां मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच जांच पर नजर

भावनगर लट्ठाकांड को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब जांच के नतीजों पर सभी की नजर है। मामले में जहरीले रसायन की मौजूदगी, नकली शराब की सप्लाई और आरोपियों के नेटवर्क से जुड़े कई पहलुओं की जांच की जा रही है।

अरविंद केजरीवाल के हमले के बाद यह मामला गुजरात की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल प्रशासन और जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अवैध शराब के पूरे नेटवर्क का पता लगाना और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना है।

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