प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने कहा कि देश में पर्याप्त स्टॉक है। जानें बफर स्टॉक और नासिक से सप्लाई का पूरा प्लान।
प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी: देश के कई हिस्सों में प्याज के दाम बढ़ने से आम लोगों की रसोई का बजट प्रभावित होने लगा है। पिछले एक महीने में प्याज की औसत खुदरा कीमत में करीब 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी की बात सामने आई है। दिल्ली, चेन्नई, गुवाहाटी और कोच्चि जैसे शहरों में कुछ बाजारों में प्याज 60 से 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रही है।
कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति को लेकर अपना पक्ष साफ किया है। सरकार का कहना है कि देश में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता है और आने वाले महीनों की घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त उत्पादन मौजूद है। साथ ही कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति बढ़ाई जा रही है।
देश में प्याज की कमी नहीं
केंद्र सरकार के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में देश में प्याज का उत्पादन करीब 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष में उत्पादन लगभग 307.67 लाख मीट्रिक टन रहा था। यानी दोनों वर्षों के अनुमानित उत्पादन में बहुत बड़ा अंतर नहीं है।
सरकार के अनुसार मौजूदा उपलब्धता घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। इसलिए प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण देश में प्याज की कमी नहीं माना जा रहा है।
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अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ते हैं प्याज के दाम?
सरकार ने बताया कि अगस्त और सितंबर के दौरान प्याज की कीमतों में मौसमी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इस अवधि में त्योहारों के कारण मांग बढ़ने के अलावा मौसम की स्थिति और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी परिस्थितियां भी कीमतों को प्रभावित करती हैं।
इन्हीं कारकों के कारण कुछ क्षेत्रों में बाजार भाव बढ़े हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि बाजार की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार हस्तक्षेप किया जाएगा।
बफर स्टॉक से बाजार में पहुंचाई जा रही प्याज
बढ़ती प्याज की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने बफर स्टॉक से नियंत्रित मात्रा में प्याज बाजार में जारी करना शुरू किया है। इसका उद्देश्य बाजार में आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को कम करना है।
सरकार उपलब्ध स्टॉक को जरूरत वाले बाजारों तक पहुंचाने पर भी ध्यान दे रही है, ताकि अलग-अलग शहरों में आपूर्ति की स्थिति बेहतर बनी रहे।
नासिक से शुरू होगी प्याज की सप्लाई
सरकारी योजना के तहत 24 अगस्त से नासिक से प्याज की ढुलाई और आपूर्ति शुरू की जा रही है। शुरुआती चरण में चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, कोच्चि और गुवाहाटी को शामिल किया गया है।
सरकार के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक ‘कांदा एक्सप्रेस’ के माध्यम से करीब 88,000 मीट्रिक टन प्याज 86 रेलवे रेक के जरिए 16 प्रमुख शहरों तक पहुंचाई जा चुकी है। आवश्यकता के आधार पर आगे और शहरों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है।
औसत खुदरा भाव करीब 42 रुपये प्रति किलो
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते शनिवार प्याज की औसत खुदरा कीमत करीब 42 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। यह एक महीने पहले की तुलना में लगभग 19 से 20 फीसदी अधिक है।
हालांकि स्थानीय बाजारों में प्याज के दाम अलग-अलग हैं। दिल्ली-एनसीआर सहित कुछ शहरों में खुदरा बाजार में प्याज 60 से 65 रुपये प्रति किलो तक बिकने की जानकारी सामने आई है।
आम परिवारों के बजट पर पड़ रहा असर
प्याज भारतीय रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सब्जियों में शामिल है। ऐसे में प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू खर्च पर पड़ता है। आलू और टमाटर के साथ प्याज भी ऐसी आवश्यक सब्जी है, जिसकी कीमत बढ़ने पर परिवारों के मासिक रसोई बजट पर दबाव बढ़ जाता है।
फिलहाल केंद्र सरकार का कहना है कि देश में प्याज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। बफर स्टॉक से आपूर्ति और नासिक से विभिन्न शहरों तक परिवहन के जरिए बाजार में उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। अब इन कदमों का असर आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों पर कितना दिखाई देता है, यह देखने वाली बात होगी।
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