पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 1989 में सेना से डिस्चार्ज पूर्व सैनिक भूपिंदर सिंह को दिव्यांगता पेंशन देने का फैसला बरकरार रखा।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व सैनिक भूपिंदर सिंह को दिव्यांगता पेंशन देने के मामले में केंद्र सरकार की चुनौती खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी सैनिक को भर्ती के समय पूरी तरह स्वस्थ और चिकित्सकीय रूप से फिट पाया गया था, लेकिन सेवा के दौरान बीमारी सामने आई, तो ऐसी बीमारी को सैन्य सेवा से संबंधित मानने का अनुमान सैनिक के पक्ष में रहेगा।
इस फैसले को पूर्व सैनिकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने कहा कि बिना ठोस आधार वाली मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट किसी पात्र पूर्व सैनिक को पेंशन के लाभ से वंचित करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकती।
1989 में सेना से हुए थे सेवानिवृत्त
मामला पूर्व सैनिक भूपिंदर सिंह से जुड़ा है, जिन्हें 31 जुलाई 1989 को सेना से डिस्चार्ज किया गया था। उन्होंने कुल 18 वर्ष 215 दिन तक सैन्य सेवा की थी।
भर्ती के समय 29 दिसंबर 1970 को हुए मेडिकल परीक्षण में भूपिंदर सिंह पूरी तरह फिट पाए गए थे और उस समय किसी गंभीर बीमारी का रिकॉर्ड नहीं था। हालांकि, सैन्य सेवा के दौरान उन्हें इस्केमिक हार्ट डिजीज हो गई।
सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने दिया था पेंशन का लाभ
भूपिंदर सिंह के मामले में सशस्त्र बल न्यायाधिकरण, चंडीगढ़ ने 6 मई 2024 को उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। न्यायाधिकरण ने 20 प्रतिशत दिव्यांगता को 50 प्रतिशत तक बढ़ाकर गणना करने और 1 अगस्त 1989 से दिव्यांगता पेंशन का लाभ देने का निर्देश दिया था।
केंद्र सरकार ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। केंद्र की ओर से दलील दी गई कि मेडिकल जांच में बीमारी को न तो सैन्य सेवा के कारण और न ही सैन्य सेवा से बढ़ी हुई माना गया था। पेंशन का दावा लंबे समय बाद किए जाने पर भी केंद्र ने आपत्ति जताई।
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हाईकोर्ट ने सैनिक के पक्ष में माना अनुमान
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने पूर्व में दिए गए न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती के समय सैनिक के स्वस्थ पाए जाने और बाद में सेवा के दौरान बीमारी सामने आने की स्थिति में बीमारी के सैन्य सेवा से संबंधित होने का अनुमान लागू होता है।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का भी उल्लेख किया। इसके अनुसार, अगर भर्ती के समय किसी बीमारी का रिकॉर्ड नहीं है, तो सैनिक को सेवा में प्रवेश के समय स्वस्थ माना जाएगा और बाद में स्वास्थ्य में आई गिरावट को सेवा से जोड़कर देखा जा सकता है।
20 प्रतिशत दिव्यांगता को 50 प्रतिशत करने का लाभ
दिव्यांगता प्रतिशत को राउंड ऑफ करने के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के राम अवतार मामले में दिए गए फैसले का उल्लेख किया। इसमें पात्र सशस्त्र बल कर्मियों को दिव्यांगता पेंशन के लिए राउंडिंग ऑफ का लाभ देने की बात कही गई थी।
हाईकोर्ट ने माना कि भूपिंदर सिंह भर्ती के समय फिट थे और बीमारी उनके सैन्य सेवाकाल में सामने आई। ऐसे में उनकी दिव्यांगता को सैन्य सेवा से संबंधित मानने का पर्याप्त आधार है।
केंद्र सरकार की याचिका खारिज
खंडपीठ ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के आदेश में हस्तक्षेप का कोई उचित आधार नहीं पाया। इसके बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की चुनौती को खारिज कर दिया।
इस फैसले से दिव्यांगता पेंशन से जुड़े मामलों में पूर्व सैनिकों को महत्वपूर्ण कानूनी आधार मिल सकता है। अदालत का फैसला यह भी रेखांकित करता है कि सैन्य सेवा के दौरान सामने आई बीमारी के मामलों में भर्ती के समय की चिकित्सकीय स्थिति को महत्वपूर्ण माना जाएगा।
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