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गुजरात में सूखे को लेकर इसुदान गढ़वी का बड़ा ऐलान, सरकार को दी चेतावनी; जानें क्या है AAP की मांग

गुजरात में सूखे की मांग को लेकर इसुदान गढ़वी ने बड़ा ऐलान किया। खंभालिया में सत्याग्रह के चौथे दिन AAP ने सरकार से किसानों को राहत देने की मांग की।

गुजरात के खंभालिया में आम आदमी पार्टी (AAP) का ‘दुष्काल घोषणा सत्याग्रह’ चौथे दिन भी जारी रहा। किसान नेता और AAP गुजरात प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने आंदोलन के दौरान सरकार से राज्य के सूखाग्रस्त क्षेत्रों को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर अगली कैबिनेट बैठक में सरकार ने इस दिशा में फैसला नहीं लिया, तो दोपहर 2 बजे के बाद आंदोलन के दूसरे चरण का ऐलान किया जाएगा।

इसुदान गढ़वी ने कहा कि जामनगर, द्वारका और पोरबंदर समेत कई इलाकों में किसानों की स्थिति गंभीर है। उनके मुताबिक, हजारों किसान स्वेच्छा से सत्याग्रह से जुड़ रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अभी अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं।

किसानों की हालत पर इसुदान गढ़वी ने जताई चिंता

सत्याग्रह स्थल पर मीडिया से बातचीत में इसुदान गढ़वी ने कहा कि जब मौसम किसानों का साथ नहीं दे रहा है, तब सरकार को उनके साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कई इलाकों में लाखों एकड़ जमीन पर फसल प्रभावित हुई है और बड़ी संख्या में किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि किसान किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि फसल नुकसान के बदले अपने अधिकार के मुआवजे की मांग कर रहे हैं। गढ़वी ने सरकार से सूखा घोषित कर प्रभावित किसानों को राहत देने की अपील की।

गुजरात में सूखा घोषित करने की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन में AAP नेताओं ने किसानों की आर्थिक स्थिति और पानी की कमी को प्रमुख मुद्दा बनाया है।

चोमासे की फसल खराब, रबी की बुवाई पर भी संकट

इसुदान गढ़वी के मुताबिक, कई इलाकों में बारिश की कमी के कारण खरीफ यानी चोमासे की फसल को नुकसान पहुंचा है। किसानों द्वारा बीज, खाद, दवाइयों, पानी और मजदूरी पर खर्च किए जाने के बाद फसल खराब होने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि बोरवेल और कुओं में पानी का स्तर घटने से आने वाले रबी सीजन की बुवाई को लेकर भी किसानों में चिंता है। ऐसे हालात में किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ने की आशंका जताई गई है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रभावित किसानों के खातों में उचित मुआवजा पहुंचाया जाए, ताकि वे अपने परिवार और खेती से जुड़े खर्चों को संभाल सकें।

सरकार पर आंदोलन दबाने का आरोप

इसुदान गढ़वी ने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार सरपंचों, कर्मचारियों, अधिकारियों और पुलिस के जरिए आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए किसानों को अलग-अलग समूहों में बांटने की कोशिश भी की जा रही है।

हालांकि, ये आरोप AAP नेताओं की ओर से लगाए गए हैं और उपलब्ध जानकारी में सरकार का पक्ष शामिल नहीं है।

गढ़वी ने गुजरात के सभी विधायकों से अपील की कि वे मुख्यमंत्री के सामने किसानों की मांग रखें और प्रभावित इलाकों को राहत दिलाने के लिए सरकार पर दबाव बनाएं।

कैबिनेट बैठक के फैसले पर टिकी नजर

इसुदान गढ़वी ने कहा कि सरकार की अगली कैबिनेट बैठक इस आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बैठक में गुजरात को सूखाग्रस्त घोषित करने का फैसला नहीं लिया गया, तो वह आंदोलन के अगले चरण की घोषणा करेंगे।

उन्होंने किसानों से निराश नहीं होने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी किसान को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। गढ़वी ने कहा कि जब तक किसानों को उनका अधिकार और मुआवजा नहीं मिलता, तब तक वह उनके साथ खड़े रहेंगे।

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गापाल इटालिया ने भी सरकार पर साधा निशाना

AAP विधायक गोपाल इटालिया ने भी सत्याग्रह स्थल पर सरकार से सूखे की स्थिति पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि दक्षिण गुजरात को छोड़कर राज्य के कई हिस्सों में बारिश कम हुई है और इसका असर खेती पर दिखाई दे रहा है।

इटालिया के अनुसार, किसानों ने बीज, खाद, सिंचाई, दवाइयों और मजदूरी पर पहले ही काफी खर्च कर दिया है। अगर फसल पूरी तरह खराब होती है तो गुजरात के किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने सरकार से किसानों के साथ-साथ खेत मजदूरों और पशुपालकों को भी आर्थिक सहायता देने की मांग की।

‘सिर्फ बारिश नहीं, अच्छे नेताओं का भी अकाल’

गोपाल इटालिया ने सरकार की नीतियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राज्य में केवल बारिश की कमी नहीं है, बल्कि अच्छे नेताओं का भी अकाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं को किसानों के सूखते खेतों के बजाय कंपनियों, ग्रांट और टेंडर की चिंता दिखाई देती है।

उन्होंने लोगों से जागरूक होकर मतदान करने की अपील की और कहा कि किसानों के हित में काम करने वाले प्रतिनिधियों को चुना जाना चाहिए।

किसानों के लिए राहत की मांग

AAP के ‘दुष्काल घोषणा सत्याग्रह’ की मुख्य मांग गुजरात के प्रभावित क्षेत्रों को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित करना है। इसके साथ पार्टी किसानों, खेत मजदूरों और पशुपालकों के लिए आर्थिक सहायता की मांग कर रही है।

गुजरात में सूखा और फसल नुकसान का मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है। खंभालिया में जारी सत्याग्रह के बीच अब सभी की नजर सरकार की अगली कैबिनेट बैठक और उसके संभावित फैसले पर है।

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