अमित शाह के आरोपों पर अरविंद केजरीवाल ने पलटवार किया। पंजाब में नशे, गैंगस्टरवाद और तीन कृषि कानूनों को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा।
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से पंजाब की कानून-व्यवस्था और नशे के कारोबार को लेकर भगवंत मान सरकार पर सवाल उठाए जाने के बाद AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पलटवार किया है। अरविंद केजरीवाल और अमित शाह के बीच यह जुबानी जंग पंजाब में ड्रग तस्करी, गैंगस्टर नेटवर्क और राज्य की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर केंद्रित है।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने अडानी पोर्ट के जरिए पंजाब में नशा फैलने का दावा किया और बीजेपी शासित राज्यों में नशे के कारोबार को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, ये आरोप राजनीतिक नेताओं के दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि यहां नहीं की गई है।
अडानी पोर्ट और नशे के कारोबार को लेकर केजरीवाल का आरोप
अरविंद केजरीवाल ने अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि पंजाब में नशे की समस्या के लिए बीजेपी भी जिम्मेदार है। उन्होंने अडानी पोर्ट के रास्ते नशा फैलने का दावा करते हुए केंद्र सरकार और बीजेपी को निशाने पर लिया।
केजरीवाल ने अपनी पोस्ट में पंजाब में गैंगस्टर नेटवर्क और नशे के कारोबार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी पंजाब में नशे की समस्या को लेकर राजनीतिक गठजोड़ की भूमिका रही है और अब एक बार फिर राज्य को लेकर राजनीतिक फायदे की कोशिश की जा रही है।
बीजेपी शासित राज्यों में नशे को लेकर भी उठाए सवाल
केजरीवाल ने अपने बयान में दावा किया कि नशे का कारोबार उन राज्यों में भी गंभीर समस्या बना हुआ है, जहां लंबे समय से बीजेपी की सरकारें हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दूसरे राज्यों में नशे की समस्या मौजूद है, तो पंजाब को लेकर बीजेपी की ओर से सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।
पंजाब में नशे का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस मुद्दे पर AAP और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।
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‘तीन काले कानूनों’ का जिक्र कर बीजेपी को घेरा
अपने सोशल मीडिया पोस्ट के आखिरी हिस्से में केजरीवाल ने पंजाब के पानी, पंजाब यूनिवर्सिटी और चंडीगढ़ से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा 2020 में लाए गए तीन कृषि कानूनों को याद दिलाते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी दोबारा ऐसे कानून लाने की कोशिश कर सकती है।
यहां केजरीवाल का इशारा उन तीन कृषि कानूनों की ओर था, जिन्हें किसानों के व्यापक विरोध के बाद केंद्र सरकार ने 2021 में वापस लेने की घोषणा की थी। केजरीवाल ने अपने बयान में पंजाब के हितों की रक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य ऐसे किसी कदम को स्वीकार नहीं करेगा।
अमित शाह ने भगवंत मान सरकार पर लगाए सवाल
दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली AAP सरकार पर हमला बोला था। शाह ने कहा कि पंजाब नशे, गैंगस्टरवाद और संगठित अपराध के बढ़ते खतरे का सामना कर रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य में आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है। शाह ने अपने बयान में मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या और दिरबा में एक पिता की मौत से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया।
शाह के मुताबिक, परविंदर सिंह के पिता ने AAP सरकार और उसके एक विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय इन दोनों घटनाओं पर पंजाब सरकार से जवाब मांगेगा।
पंजाब को नशामुक्त और गैंगस्टरमुक्त बनाने का बीजेपी का दावा
अमित शाह ने पंजाब में नशे के कारोबार पर रोक लगाने, युवाओं के भविष्य की रक्षा करने और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी राज्य में सत्ता में आने पर पंजाब को नशामुक्त, गैंगस्टरमुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाएगी।
शाह ने यह भी कहा कि चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने पंजाब को नशामुक्त बनाने का वादा किया था, लेकिन मौजूदा हालात को लेकर सवाल बने हुए हैं।
2027 के चुनाव से पहले तेज हो सकती है राजनीतिक जंग
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नशे का कारोबार, गैंगस्टरवाद और कानून-व्यवस्था राजनीतिक दलों के बीच अहम मुद्दे बनते नजर आ रहे हैं। अमित शाह के आरोपों के जवाब में अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों और पंजाब से जुड़े मुद्दों को उठाया है।
आने वाले समय में इन मुद्दों पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो सकती है। हालांकि, नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों पर जनता की नजर राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ सरकारों की कार्रवाई और जमीनी नतीजों पर भी रहेगी।
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