धर्म

सावन में क्यों बढ़ जाता है गोवर्धन परिक्रमा का महत्व? जानिए 84 कोस ब्रज यात्रा से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

सावन 2026 में गोवर्धन धाम में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़, भगवान श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए भक्त करते हैं परिक्रमा

सावन में गोवर्धन परिक्रमा का महत्व बढ़ जाता है। जानें 84 कोस ब्रज यात्रा, गोवर्धन पर्वत और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।

गोवर्धन परिक्रमा: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, लेकिन ब्रजभूमि में इस पवित्र महीने का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। सावन के दौरान मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन धाम में धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने पहुंचते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में श्रद्धा और आस्था के साथ गोवर्धन परिक्रमा करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। भक्तों का विश्वास है कि इस यात्रा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

सावन 2026 कब से शुरू होगा?

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक रहेगा। यह महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दौरान देशभर में पूजा-पाठ, कांवड़ यात्रा और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है।

ब्रज क्षेत्र में सावन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े तीर्थ स्थलों पर भी भक्तों की संख्या बढ़ जाती है।

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गोवर्धन परिक्रमा क्यों मानी जाती है खास?

गोवर्धन पर्वत को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ा एक पवित्र स्थल माना जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में जब ब्रजवासियों पर इंद्र देव का क्रोध बरसा और भारी बारिश से लोग परेशान हो गए, तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर सभी ग्रामीणों की रक्षा की थी।

इस घटना के बाद से गोवर्धन पर्वत की पूजा और परिक्रमा करने की परंपरा शुरू हुई। भक्त मानते हैं कि गोवर्धन की परिक्रमा करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

सावन के दौरान यह परिक्रमा इसलिए भी विशेष मानी जाती है क्योंकि इस समय पूरा ब्रज क्षेत्र भक्ति और धार्मिक आयोजनों से सराबोर रहता है।

क्या है गोवर्धन की 84 कोस यात्रा?

गोवर्धन परिक्रमा और 84 कोस ब्रज यात्रा अलग-अलग धार्मिक यात्राएं मानी जाती हैं। जहां गोवर्धन पर्वत की सामान्य परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर की होती है, वहीं 84 कोस यात्रा पूरे ब्रज क्षेत्र की विस्तृत धार्मिक यात्रा है।

84 कोस ब्रज यात्रा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े कई पवित्र स्थलों के दर्शन किए जाते हैं। यह यात्रा मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव सहित ब्रज के अनेक धार्मिक स्थानों से जुड़ी मानी जाती है।

84 कोस ब्रज यात्रा का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रज की 84 कोस यात्रा करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस यात्रा को भक्ति, आस्था और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

भक्तों का विश्वास है कि ब्रज की धरती का हर कण भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस यात्रा के दौरान अलग-अलग तीर्थ स्थलों के दर्शन करना पुण्यदायी माना जाता है।

सावन में गोवर्धन धाम का आध्यात्मिक महत्व

सावन के महीने में जब प्रकृति हरियाली से भर जाती है, तब ब्रज की धार्मिक यात्रा का महत्व और बढ़ जाता है। श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करते हुए गोवर्धन धाम पहुंचते हैं।

गोवर्धन परिक्रमा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भक्तों के लिए आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक अनुभव की यात्रा मानी जाती है। यही कारण है कि सावन के दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु ब्रजभूमि पहुंचकर इस पवित्र यात्रा में शामिल होते हैं।

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