पंजाब स्कूलों में एआई शिक्षा 1 सितंबर से 8वीं से 12वीं तक शुरू होने की तैयारी है। जानें फीस, ऑनलाइन क्लास, रजिस्ट्रेशन और शिक्षक ट्रेनिंग की पूरी जानकारी।
पंजाब के स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल शुरू करने की तैयारी है। पंजाब स्कूलों में एआई शिक्षा को 8वीं से 12वीं कक्षा तक लागू करने की योजना पर चर्चा तेज हो गई है। प्रस्ताव के अनुसार, यह व्यवस्था 1 सितंबर 2026 से शुरू की जा सकती है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) से संबद्ध स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बुनियादी जानकारी देने के लिए ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने की योजना है।
यह योजना पीएसईबी की अनिवार्य सीपीडी प्रशिक्षण कार्यशाला के बाद चर्चा में आई है। बताया जा रहा है कि सरकारी स्कूलों में इस पाठ्यक्रम को मुफ्त रखने का प्रस्ताव है, जबकि पीएसईबी से संबद्ध अन्य स्कूलों के विद्यार्थियों से 100 रुपये प्रति माह शुल्क लेने की बात कही जा रही है।
8वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को मिलेगी एआई की शिक्षा
प्रस्तावित पंजाब स्कूलों में एआई शिक्षा के तहत 8वीं, 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित विषय पढ़ाया जाएगा। इसके लिए करीब 35 से 40 मिनट की ऑनलाइन कक्षा आयोजित किए जाने की जानकारी है।
बोर्ड को उम्मीद है कि इन कक्षाओं में 8वीं से 12वीं तक के करीब 80 प्रतिशत विद्यार्थी हिस्सा ले सकते हैं। योजना का संचालन सिंगापुर की एक निजी कंपनी द्वारा किए जाने की बात सामने आई है।
विद्यार्थियों से कितना शुल्क लिया जाएगा?
योजना के तहत पीएसईबी से संबद्ध स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग शुल्क प्रस्तावित हैं। विद्यार्थियों का पंजीकरण ‘सरबत एआई पोर्टल’ के माध्यम से करवाने की बात कही जा रही है।
प्रस्तावित शुल्क के अनुसार:
मासिक शुल्क: 100 रुपये
साल में तीन परीक्षाओं का शुल्क: 50 रुपये
दो इकाई परीक्षाओं का शुल्क: 10 रुपये
किताब का शुल्क: 73 रुपये प्रति विद्यार्थी
वहीं सरकारी स्कूलों में इस योजना को निशुल्क रखने का प्रस्ताव बताया जा रहा है।
शिक्षकों की भी होगी विशेष ट्रेनिंग
पंजाब स्कूलों में एआई शिक्षा की योजना केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं होगी। प्रत्येक स्कूल से दो शिक्षकों को इस विषय के लिए प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव है।
बताया जा रहा है कि शिक्षकों की चार सप्ताह की ट्रेनिंग के लिए पहले साल 800 रुपये प्रति शिक्षक शुल्क रखा गया है। वहीं तीन साल की पूरी प्रशिक्षण अवधि में प्रति शिक्षक कुल खर्च करीब 21,000 रुपये बताया जा रहा है।
शिक्षकों के प्रशिक्षण और इससे जुड़े खर्च को लेकर भी शिक्षा जगत में चर्चा शुरू हो गई है।
ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल और लैपटॉप की जरूरत
एआई की कक्षाएं ऑनलाइन होने के कारण विद्यार्थियों को घर पर पढ़ाई और अभ्यास के लिए मोबाइल, लैपटॉप या अन्य डिजिटल उपकरणों की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में उन परिवारों के लिए परेशानी बढ़ सकती है, जिनके पास पर्याप्त डिजिटल संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
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इसके अलावा कई स्कूलों में कंप्यूटर लैब और इंटरनेट कनेक्टिविटी से जुड़ी समस्याएं होने की बात कही जा रही है। ऐसे में योजना को लागू करने से पहले बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
शिक्षकों और अभिभावकों ने उठाए सवाल
प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान शिक्षकों की ओर से ऑनलाइन कक्षाओं और जरूरी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है। शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि पंजाब स्कूलों में एआई शिक्षा शुरू करना भविष्य की जरूरत हो सकती है, लेकिन इसे लागू करने से पहले स्कूलों की तकनीकी क्षमता और विद्यार्थियों की परिस्थितियों का ध्यान रखना जरूरी है।
अभिभावकों की चिंता खासतौर पर अतिरिक्त फीस, मोबाइल या लैपटॉप की जरूरत और घर पर इंटरनेट के खर्च को लेकर है। उनका मानना है कि नई व्यवस्था से किसी परिवार पर अनावश्यक आर्थिक दबाव नहीं पड़ना चाहिए।
सत्र के बीच लागू होने से पढ़ाई पर असर की आशंका
शैक्षणिक सत्र शुरू हुए करीब पांच महीने बीत चुके हैं। ऐसे में सितंबर से नई ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने पर विद्यार्थियों के मौजूदा पढ़ाई कार्यक्रम पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
एक ओर स्कूलों में फीस वृद्धि को नियंत्रित करने की बात होती है, वहीं दूसरी ओर नए पाठ्यक्रम से जुड़े शुल्क और प्रशिक्षण खर्च को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी कारण शिक्षक और अभिभावक योजना के शुल्क, पंजीकरण और प्रशिक्षण व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
एआई शिक्षा से विद्यार्थियों को क्या मिलेगा फायदा?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से शिक्षा, तकनीक और रोजगार के क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। स्कूल स्तर पर विद्यार्थियों को एआई की शुरुआती समझ देने से उन्हें भविष्य की तकनीकी दुनिया को समझने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, पंजाब स्कूलों में एआई शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षक, बेहतर इंटरनेट, कंप्यूटर लैब और विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त डिजिटल संसाधन जरूरी होंगे। केवल ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने के बजाय इन सुविधाओं पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल पंजाब स्कूलों में एआई शिक्षा को लेकर अंतिम नियमों और व्यवस्था का इंतजार है। योजना लागू होने से पहले शुल्क, पाठ्यक्रम, पंजीकरण और प्रशिक्षण से जुड़े प्रावधानों पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
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