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चंबल पेयजल योजना पर अशोक गहलोत का BJP सरकार पर हमला, बोले- 85 हजार लोगों को और इंतजार क्यों?

चंबल पेयजल योजना के काम में देरी पर अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने बजट जारी कर योजना का काम जल्द शुरू कराने की मांग की।

चंबल पेयजल योजना: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने चंबल पेयजल योजना के काम में देरी को लेकर राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही और बजट की कमी के कारण परियोजना का काम लंबे समय से रुका हुआ है।

उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि योजना के लिए जल्द बजट जारी किया जाए और बंद पड़े निर्माण कार्य को दोबारा शुरू कराया जाए, ताकि हिंडोली विधानसभा क्षेत्र के हजारों लोगों को पेयजल सुविधा मिल सके।

900 करोड़ रुपये की योजना पर उठे सवाल

अशोक गहलोत के मुताबिक, पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हिंडोली विधानसभा क्षेत्र के 285 गांवों और 286 मजरों में पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब 900 करोड़ रुपये की चंबल पेयजल योजना स्वीकृत की गई थी।

उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना से करीब 85 हजार लोगों को लाभ मिलना है, लेकिन काम पिछले करीब छह महीने से पूरी तरह बंद पड़ा है। गहलोत के अनुसार, निर्माण स्थल पर मौजूद मशीनरी और उपकरण भी लंबे समय से इस्तेमाल नहीं होने के कारण खराब हो रहे हैं।

नवंबर 2024 में पूरा होना था काम

गहलोत ने कहा कि चंबल पेयजल योजना को नवंबर 2024 तक पूरा किया जाना था। उनके अनुसार, परियोजना में पहले वन विभाग से जुड़ी आपत्तियों के कारण देरी हुई।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इसके बाद भुगतान से जुड़ी समस्या के कारण ठेकेदार ने काम की गति कम कर दी। अब उन्होंने दावा किया कि परियोजना का काम पूरी तरह रुक गया है।

गहलोत ने राज्य सरकार से इस मामले में जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है।

बजट की कमी का लगाया आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार द्वारा पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं कराने और प्रशासनिक लापरवाही के कारण चंबल पेयजल योजना लगातार अटकी हुई है।

उन्होंने कहा कि पेयजल जैसी बुनियादी जरूरत से जुड़ी परियोजना को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार बदलने के बाद पहले से स्वीकृत जनहित की योजनाओं का काम प्रभावित नहीं होना चाहिए।

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‘योजनाएं किसी पार्टी की नहीं होतीं’

गहलोत ने भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि विकास योजनाएं किसी राजनीतिक दल की नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाएं आम लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाई जाती हैं।

उन्होंने हिंडोली की चंबल पेयजल योजना को एक उदाहरण बताते हुए आरोप लगाया कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कई परियोजनाएं अधूरी या लंबित पड़ी हैं।

85 हजार लोगों के लिए पेयजल का मुद्दा

गहलोत ने कहा कि चंबल परियोजना पूरी होने से हिंडोली क्षेत्र के करीब 85 हजार लोगों को पेयजल सुविधा मिल सकती है। ऐसे में परियोजना का काम लंबे समय तक बंद रहना स्थानीय लोगों के हित में नहीं है।

उन्होंने सरकार से अपील की कि बजट जारी कर निर्माण कार्य को तत्काल दोबारा शुरू कराया जाए और लोगों को पेयजल सुविधा के लिए और इंतजार न करना पड़े।

गहलोत ने सरकार से की तत्काल कार्रवाई की मांग

चंबल पेयजल योजना को लेकर गहलोत ने राज्य सरकार से स्पष्ट तौर पर हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि परियोजना में देरी की वजहों को दूर कर काम को तय समयसीमा में पूरा किया जाना चाहिए।

फिलहाल, गहलोत के आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया इस बयान में सामने नहीं आई है। परियोजना की मौजूदा स्थिति और काम दोबारा शुरू होने को लेकर सरकार की ओर से आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

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