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उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू, मदरसा बोर्ड अधिनियम निरस्त; मुख्यमंत्री धामी का बड़ा फैसला

उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू कर मदरसा बोर्ड अधिनियम निरस्त किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर जोर दिया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को घोषणा की कि उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम और गैर-सरकारी अरबी-फारसी मदरसों की मान्यता से जुड़े पुराने नियमों को निरस्त करने का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है।

आधुनिक और पारदर्शी शिक्षा प्रणाली की ओर कदम

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है जो आधुनिक, पारदर्शी, उच्च गुणवत्ता वाली और जवाबदेह हो तथा राष्ट्र निर्माण के मूल्यों पर आधारित हो।

सभी अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए समान मान्यता प्रणाली

नए अधिनियम के तहत सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए एक समान और पारदर्शी मान्यता प्रणाली लागू की जाएगी। सरकार का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को अधिक व्यवस्थित और गुणवत्ता-आधारित बनाना है।

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बच्चों को आधुनिक और मूल्य आधारित शिक्षा देने पर जोर

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य राज्य के हर बच्चे को आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कौशल विकास और भारतीय मूल्यों से सशक्त बनाना है, ताकि वे विकसित उत्तराखंड और विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे सकें।

चंपावत में 123 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ

इससे पहले मुख्यमंत्री धामी ने चंपावत में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में 123.79 करोड़ रुपये की 17 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें 27.79 करोड़ रुपये की 8 पूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन तथा 96 करोड़ रुपये की 9 नई परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है।

जिम कॉर्बेट ट्रेल और सिटी सेंटर परियोजना का शुभारंभ

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 3.49 करोड़ रुपये की लागत से विकसित जिम कॉर्बेट ट्रेल का उद्घाटन किया। साथ ही चंपावत बस स्टेशन रोडवेज क्षेत्र में बनने वाले सिटी सेंटर प्रोजेक्ट का भी शिलान्यास किया गया।

विभिन्न वर्गों से संवाद, जनभागीदारी पर जोर

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मंदिरों के पुजारियों, युवाओं, जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों, स्वच्छता कर्मियों, शिक्षकों, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं, टैक्सी यूनियन सदस्यों, बैंक कर्मचारियों और मीडिया कर्मियों सहित समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद किया।

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