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PM मोदी-ट्रंप बैठक से पहले अमेरिका का बड़ा फैसला, ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ का नाम बदला, भारत पर असर की चर्चा तेज

अमेरिका ने इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर US-Pacific Command किया, मोदी-ट्रंप बैठक से पहले इस कदम पर भारत पर असर की चर्चा।

फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन से पहले भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर नई हलचल देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित बैठक से ठीक पहले अमेरिका ने एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है, जिसने कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने “इंडो-पैसिफिक कमांड” का नाम बदलकर “यूएस-पैसिफिक कमांड” कर दिया है। इस बदलाव के बाद नाम से “इंडो” शब्द हटा दिया गया है, जिससे क्षेत्रीय रणनीति और भारत की भूमिका को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं।

यह कमांड हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक के विशाल समुद्री क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालती है। इसी कमांड के तहत अमेरिका का सातवां बेड़ा भी आता है, जिसने ऐतिहासिक रूप से कई रणनीतिक अभियानों में भूमिका निभाई है।

विशेष रूप से 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भी इस बेड़े की गतिविधियां चर्चा में रही थीं, जब इसे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण माना गया था।

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इस कमांड की स्थापना 1 जनवरी 1947 को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन ने की थी। यह लंबे समय तक “USPACOM” के नाम से संचालित होती रही और इसे अमेरिका की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी संयुक्त सैन्य कमांडों में से एक माना जाता है।

नाम परिवर्तन के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह कदम भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की भू-राजनीति पर कोई प्रभाव डालेगा या यह केवल प्रशासनिक पुनर्गठन है।

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले जी7 शिखर सम्मेलन और मोदी-ट्रंप बैठक के दौरान इस मुद्दे पर अप्रत्यक्ष रूप से चर्चा हो सकती है, खासकर क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री रणनीति को लेकर।

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