गुजरात राजनीति में हड़कंप! AAP ने BJP पर लगाया उम्मीदवारों को धमकाने और प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप। चुनाव आयोग से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग।
गुजरात राजनीति में एक बार फिर गरमाहट देखने को मिल रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्य के आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। AAP का दावा है कि उनके उम्मीदवारों को डरा-धमकाकर नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन हो रहा है।
प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग का दावा
आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. करण बारोट ने आरोप लगाया है कि गुजरात राजनीति को प्रभावित करने के लिए भाजपा सरकारी तंत्र और पुलिस प्रशासन का खुलेआम दुरुपयोग कर रही है। डॉ. बारोट के अनुसार, AAP के कई उम्मीदवारों को अप्रत्यक्ष रूप से निशाना बनाया जा रहा है ताकि वे चुनावी मैदान से हट जाएं। उन्होंने इसे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर एक सीधा हमला बताया है।
डॉ. करण बारोट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विपक्षी उम्मीदवारों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने के लिए उन पर भारी राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है।
टूट रहा है पुराना सियासी समीकरण?
AAP नेताओं ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा है कि वर्तमान में गुजरात राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच जो कथित ‘राजनीतिक समझ’ थी, वह अब पूरी तरह टूट चुकी है। पार्टी का मानना है कि इस बदलाव के कारण राज्य में नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं, जिससे सत्ता पक्ष में घबराहट है और इसी वजह से वे विपक्षी उम्मीदवारों को रोकने के लिए दबाव की राजनीति का सहारा ले रहे हैं।
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સમગ્ર ગુજરાતમાં ઠેર ઠેર આમ આદમી પાર્ટીના ઉમેદવારો ઉપર ફોર્મ પાછું ખેંચવા દબાણ ઊભું કરવામાં આવી રહ્યું છે.
ભાજપના હિસાબે પોલીસ તંત્ર અને અધિકારીઓ આપના ઉમેદવારોને ડરાવી ધમકાવીને ફોર્મ પાછું ખેંચાવવાના પ્રયાસ કરી રહ્યા છે.
આ બધા ઘટનાક્રમ વચ્ચે હવે ગુજરાતમાં ભાજપ અને કોંગ્રેસનું… pic.twitter.com/drXbmThQmz
— AAP Gujarat (@AAPGujarat) April 15, 2026
चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग
आम आदमी पार्टी ने इस पूरे मामले को लेकर चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। पार्टी की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
सभी उम्मीदवारों को सुरक्षित और भयमुक्त चुनावी माहौल प्रदान किया जाए।
प्रशासनिक और पुलिस तंत्र के दुरुपयोग की निष्पक्ष जांच हो।
नामांकन वापसी की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के दबाव को तुरंत रोका जाए।
गुजरात राजनीति में उभरते इस विवाद ने चुनावी सरगर्मियों को और तेज कर दिया है। AAP ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वे इन धमकियों के आगे झुकने वाले नहीं हैं और उनके उम्मीदवार मजबूती से डटे रहेंगे।
लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव पर सवाल
डॉ. बारोट ने जोर देकर कहा कि अगर उम्मीदवारों को अपनी इच्छा के विरुद्ध नामांकन वापस लेने पर मजबूर किया जाता है, तो यह जनता के साथ धोखा है। गुजरात राजनीति में इस तरह के आरोप पहले भी लगते रहे हैं, लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान AAP की यह आक्रामक रणनीति राज्य में तीसरे विकल्प की मजबूती को दर्शाती है।
अंततः, गुजरात राजनीति की दिशा अब इस बात पर निर्भर करेगी कि चुनाव आयोग इन शिकायतों पर क्या कदम उठाता है और मतदाता इस ‘दबाव की राजनीति’ को किस नजरिए से देखते हैं।
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