राजस्थान में अब प्राइवेट जगह पर सरकारी कार्यक्रम नहीं होंगे। फिजूलखर्ची रोकने के भजनलाल सरकार के फैसले पर कांग्रेस ने उठाए सवाल। जानें पूरी खबर।
राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य में आयोजित होने वाले सभी सरकारी कार्यक्रमों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब राज्य के सभी सरकारी विभाग अपने कार्यक्रम केवल सरकारी भवनों या परिसरों में ही आयोजित कर सकेंगे। प्राइवेट जगह पर सरकारी कार्यक्रम आयोजित करने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। सरकार के इस निर्णय के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
क्या है सरकार का नया आदेश?
राजस्थान सरकार द्वारा जारी हालिया फरमान के अनुसार, अब किसी भी विभाग को महंगे होटलों या निजी रिसॉर्ट्स में मीटिंग, सेमिनार या उत्सव करने की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी विशेष परिस्थिति में प्राइवेट जगह पर सरकारी कार्यक्रम आयोजित करना अनिवार्य होता है, तो इसके लिए मुख्य सचिव (Chief Secretary) की अध्यक्षता वाली हाई-लेवल कमेटी से लिखित मंजूरी लेनी होगी।
सरकार का तर्क है कि राज्य के पास पर्याप्त संख्या में सरकारी टाउन हॉल, ऑडिटोरियम और कॉन्फ्रेंस रूम उपलब्ध हैं। ऐसे में प्राइवेट जगह पर सरकारी कार्यक्रम आयोजित करना जनता के पैसे की बर्बादी है।
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सरकार की दलील: फिजूलखर्ची पर लगेगी लगाम
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विजन स्पष्ट है—जनता की गाढ़ी कमाई का सदुपयोग होना चाहिए। सरकार का मानना है कि:
सरकारी भवनों की उपयोगिता बढ़ेगी।
होटलों के भारी-भरकम बिलों से राहत मिलेगी।
प्रशासनिक पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित होगा।
उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि पिछली गहलोत सरकार में सरकारी खजाने का दुरुपयोग हुआ था, जिसे अब सुधारा जा रहा है।
कांग्रेस ने खड़े किए सवाल: “आर्थिक संकट में है राजस्थान”
विपक्ष ने इस फैसले को सरकार की विफलता के रूप में पेश किया है। विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक रफीक खान ने आरोप लगाया कि प्राइवेट जगह पर सरकारी कार्यक्रम बंद करने का असली कारण मितव्ययिता नहीं, बल्कि खाली खजाना है।
कांग्रेस के मुख्य आरोप:
राज्य की आर्थिक स्थिति खस्ताहाल है और सरकार ‘दिवालिया’ होने की कगार पर है।
मुख्यमंत्री खुद महंगे हेलीकॉप्टर दौरों पर लाखों खर्च कर रहे हैं, उस पर रोक क्यों नहीं?
सरकार को प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर ‘श्वेत पत्र’ जारी करना चाहिए।
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