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हरियाणा राइट टू बिजनेस बिल 2026: हरियाणा में कारोबार करना होगा आसान, एमएसएमई को 15 दिन में मिलेगी सैद्धांतिक मंजूरी

हरियाणा राइट टू बिजनेस बिल 2026 से एमएसएमई के लिए कारोबार आसान होगा। 15 कार्यदिवस में सैद्धांतिक मंजूरी और 36 माह में नियमित मंजूरी का प्रावधान है।

हरियाणा में छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हरियाणा विधानसभा ने हरियाणा राइट टू बिजनेस बिल 2026 पारित किया है। इस नए प्रावधान का उद्देश्य पात्र नए और विस्तार करने वाले विनिर्माण एमएसएमई के लिए कारोबार शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को सरल बनाना है।

15 कार्यदिवस में मिलेगी सैद्धांतिक मंजूरी

हरियाणा राइट टू बिजनेस बिल 2026 के तहत पात्र विनिर्माण एमएसएमई को आवेदन के बाद 15 कार्यदिवसों के भीतर सैद्धांतिक मंजूरी देने का प्रावधान किया गया है। इससे कारोबारियों को लंबे समय तक मंजूरियों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और वे अपने उद्योग से जुड़ी गतिविधियों को तेजी से आगे बढ़ा सकेंगे।

इस व्यवस्था की एक खास बात यह है कि यदि निर्धारित समय के भीतर संबंधित निर्णय नहीं लिया जाता है तो बिल में डीम्ड अप्रूवल का प्रावधान भी रखा गया है। यानी तय अवधि में कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में नियमों के अनुसार मंजूरी मानी जा सकती है।

नियमित मंजूरियों के लिए मिलेगा 36 महीने का समय

नए प्रावधानों के तहत उद्यमों को सभी जरूरी नियमित मंजूरियां हासिल करने के लिए 36 महीने यानी तीन साल का समय दिया जाएगा। इससे कारोबारियों को उद्योग स्थापित करने और संचालन शुरू करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।

हरियाणा राइट टू बिजनेस बिल 2026 के तहत इस अवधि के दौरान उद्यमों को नियमित निरीक्षण और दंडात्मक कार्रवाई से भी संरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य नए कारोबारियों पर शुरुआती दौर में अनावश्यक प्रशासनिक दबाव को कम करना है।

निवेश और रोजगार को मिल सकती है गति

सरकार की इस पहल से प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र को नई गति मिलने की उम्मीद है। आसान मंजूरी प्रक्रिया के कारण नए उद्यमियों को कारोबार शुरू करने में सुविधा हो सकती है, वहीं मौजूदा उद्योगों के विस्तार का रास्ता भी आसान हो सकता है।

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एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने से निवेश के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना भी बढ़ती है। छोटे और मध्यम उद्योग प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ऐसे में मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाना कारोबार के माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

कारोबारियों के लिए कम हो सकती है प्रशासनिक परेशानी

आमतौर पर किसी उद्योग को शुरू करने या उसका विस्तार करने के लिए अलग-अलग स्तर पर कई मंजूरियों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में प्रक्रिया में लगने वाला समय कारोबारियों के लिए चुनौती बन सकता है। हरियाणा राइट टू बिजनेस बिल 2026 इसी तरह की देरी को कम करने पर केंद्रित है।

15 कार्यदिवस में सैद्धांतिक मंजूरी और तय समय में फैसला नहीं होने पर डीम्ड अप्रूवल जैसे प्रावधान कारोबारियों को अधिक स्पष्ट और समयबद्ध व्यवस्था उपलब्ध करा सकते हैं।

एमएसएमई सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण बदलाव

हरियाणा राइट टू बिजनेस बिल 2026 को राज्य में कारोबार को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा सकता है। 36 महीने की अवधि और निरीक्षण व दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण मिलने से नए उद्यमियों को अपना कारोबार व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार की यह पहल नए और विस्तार करने वाले विनिर्माण एमएसएमई के लिए मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने, प्रशासनिक बाधाओं को कम करने और कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हरियाणा राइट टू बिजनेस बिल 2026 के प्रावधानों से राज्य में छोटे और मध्यम उद्योगों के विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

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