हरियाणा सरकार ने स्कूलों में श्रमदान अनिवार्य किया और शिक्षकों के मोबाइल उपयोग पर प्रतिबंध लगाया, शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और सुधार पर जोर।
हरियाणा सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दो बड़े फैसलों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए स्कूलों में श्रमदान को अनिवार्य कर दिया है और शिक्षकों के कक्षा में मोबाइल फोन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है।
स्कूलों में श्रमदान होगा अनिवार्य
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने निर्देश दिया है कि सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में श्रमदान को शामिल किया जाएगा ताकि विद्यार्थियों में अनुशासन, जिम्मेदारी और सहभागिता की भावना विकसित हो सके। यह कदम शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक और मूल्य आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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शिक्षकों के मोबाइल उपयोग पर सख्ती
हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सैनी के आदेश के अनुसार, कक्षा में शिक्षकों के मोबाइल फोन के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। मोबाइल फोन स्कूल में प्रिंसिपल के कक्ष में जमा रहेंगे ताकि पढ़ाई के दौरान किसी प्रकार का व्यवधान न हो।
ग्रीष्मकालीन अवकाश और शिक्षा सुधार
सरकार ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए 25 मई से 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया है। इसी के साथ मुख्यमंत्री नायब सैनी ने स्कूलों में खेल गतिविधियों और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए हैं।
हरियाणा शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के सुझावों पर अमल
महीपाल ढांडा ने हाल ही में स्कूलों का दौरा कर कई सुझाव दिए थे, जिन्हें मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया। इन सुझावों के आधार पर स्कूलों में अनुशासन और शैक्षणिक सुधार के लिए नई नीतियां लागू की जा रही हैं।
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