रेलवे में SC-ST कर्मचारियों के प्रमोशन नियमों में बड़ा बदलाव, खाली आरक्षित पद भरने के लिए लागू हुई नई नीति
रेलवे ने SC-ST कर्मचारियों के प्रमोशन नियमों में बदलाव किया है। 10% अंकों की छूट और ‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ नीति से खाली पद भरेंगे।
भारतीय रेलवे ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) कर्मचारियों के प्रमोशन से जुड़े नियमों को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए प्रावधानों के तहत गैर-सुरक्षा श्रेणी के पदों पर आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को योग्यता अंकों में राहत देने के साथ-साथ ‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ व्यवस्था का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रमोशन में लंबे समय से खाली रह रहे आरक्षित पदों को भरना है।
SC-ST कर्मचारियों के प्रमोशन में 10% अंकों की छूट
रेलवे बोर्ड के नए निर्देशों के अनुसार, ग्रुप ‘सी’ के भीतर वरिष्ठता के आधार पर होने वाले चयन में SC और ST कर्मचारियों को प्रोफेशनल एबिलिटी तथा कुल अंकों में 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी। वहीं ग्रुप ‘सी’ से ग्रुप ‘बी’ के 70 प्रतिशत चयन कोटे में सामान्य कर्मचारियों के लिए 60 प्रतिशत अंक की आवश्यकता होती है, जबकि SC/ST कर्मचारियों के लिए यह सीमा 50 प्रतिशत रखी गई है।
हालांकि सर्विस रिकॉर्ड में न्यूनतम 15 अंक हासिल करना जरूरी रहेगा। इस तरह SC-ST कर्मचारियों का प्रमोशन तय नियमों और निर्धारित न्यूनतम मानकों के आधार पर किया जाएगा।
खाली आरक्षित पदों के लिए ‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’
रेलवे के नए आदेश का सबसे अहम हिस्सा ‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ नीति है। यदि निर्धारित छूट देने के बाद भी आरक्षित पदों के लिए पर्याप्त SC/ST कर्मचारी क्वालिफाई नहीं कर पाते हैं, तो परीक्षा में असफल रहे उम्मीदवारों में से बेहतर प्रदर्शन करने वालों पर विचार किया जाएगा।
इसके लिए उम्मीदवार को लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और सर्विस रिकॉर्ड में अलग-अलग कम से कम 20 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे। इसके अलावा तीनों हिस्सों को मिलाकर भी न्यूनतम 20 प्रतिशत अंक जरूरी होंगे।
इस व्यवस्था का मकसद उन आरक्षित पदों को खाली रहने से रोकना है, जिन्हें सामान्य प्रक्रिया में योग्य उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण लंबे समय तक नहीं भरा जा सका।
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6 महीने के लिए एड-हॉक प्रमोशन
‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ के तहत चुने गए कर्मचारियों को शुरुआत में स्थायी प्रमोशन नहीं दिया जाएगा। उन्हें छह महीने के लिए एड-हॉक आधार पर पदोन्नत किया जाएगा।
इस दौरान कर्मचारी की कार्यक्षमता, प्रदर्शन और आचरण की समीक्षा की जाएगी। छह महीने पूरे होने के बाद सक्षम अधिकारी रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेंगे। प्रदर्शन संतोषजनक पाए जाने पर ही प्रमोशन को नियमित किया जाएगा।
इस प्रक्रिया से SC-ST कर्मचारियों का प्रमोशन होने के साथ कर्मचारियों की वास्तविक कार्यक्षमता की निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।
सुरक्षा से जुड़े पदों पर कोई छूट नहीं
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह राहत सुरक्षा श्रेणी के पदों पर लागू नहीं होगी। ट्रेन संचालन और यात्रियों की संरक्षा से सीधे जुड़े पदों पर योग्यता मानकों में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
यानी जहां यात्रियों और रेलवे परिचालन की सुरक्षा सीधे जुड़ी है, वहां मौजूदा योग्यता और चयन मानकों को ही प्राथमिकता मिलेगी।
LDCE में भी नहीं लागू होगी यह नीति
ग्रुप ‘सी’ के तहत लिमिटेड डिपार्टमेंटल कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन यानी LDCE में भी ‘बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड’ व्यवस्था लागू नहीं होगी। ऐसे मामलों में पैनल मेरिट के आधार पर तैयार किया जाता है।
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि SC/ST कर्मचारी बिना किसी रियायत के सामान्य योग्यता मानकों पर परीक्षा पास करता है, तो उसे अनारक्षित यानी UR सीट पर समायोजित किया जाएगा। इससे आरक्षित कोटे की सीट दूसरे पात्र SC/ST उम्मीदवार के लिए उपलब्ध रह सकेगी।
पुराने चयन दोबारा नहीं खोले जाएंगे
रेलवे बोर्ड के निर्देशों में यह भी साफ किया गया है कि पहले पूरी हो चुकी चयन प्रक्रियाओं को नए नियमों के आधार पर दोबारा नहीं खोला जाएगा। नई व्यवस्था आगे होने वाली पात्र प्रक्रियाओं में लागू होगी।
कुल मिलाकर SC-ST कर्मचारियों का प्रमोशन आसान बनाने के साथ रेलवे का लक्ष्य आरक्षित पदों को समय पर भरना और अलग-अलग जोन में नियमों को एक समान तरीके से लागू करना है। SC-ST कर्मचारियों का प्रमोशन से जुड़ी नई व्यवस्था में एक तरफ अंकों में राहत दी गई है, तो दूसरी ओर सुरक्षा श्रेणी और मेरिट आधारित LDCE जैसी प्रक्रियाओं को इससे बाहर रखा गया है।
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