कोकिला व्रत 2026: जुलाई में कब रखा जाएगा कोकिला व्रत? जानें तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व
माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए किया था यह व्रत, सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए माना जाता है शुभ
कोकिला व्रत 2026 कब रखा जाएगा? जानें जुलाई में इसकी सही तिथि, पूजा विधि, धार्मिक महत्व और माता पार्वती से जुड़ी पौराणिक कथा।
कोकिला व्रत 2026: हिंदू धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से जुड़े कई व्रत और पर्वों का विशेष महत्व माना गया है। इन्हीं में से एक है कोकिला व्रत, जिसे प्रेम, वैवाहिक सुख और सौभाग्य से जुड़ा हुआ पवित्र व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को स्वयं माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए किया था।
कोकिला व्रत 2026 को लेकर भक्तों में उत्सुकता बनी हुई है। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं और विवाह योग्य कन्याओं के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से इस व्रत को करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।
कोकिला व्रत 2026 कब रखा जाएगा?
हिंदू पंचांग के अनुसार, कोकिला व्रत 2026 आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को रखा जाएगा। पंचांग के मुताबिक, आषाढ़ पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 28 जुलाई 2026, मंगलवार शाम 6 बजकर 18 मिनट से होगी। वहीं, पूर्णिमा तिथि का समापन 29 जुलाई 2026, बुधवार रात 8 बजकर 5 मिनट पर होगा।
उदयातिथि के अनुसार, कोकिला व्रत 28 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करने का विधान है।
क्यों रखा जाता है कोकिला व्रत?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। एक मान्यता के अनुसार, उन्हें एक श्राप के कारण कोयल का रूप धारण करना पड़ा था। उन्होंने कोयल रूप में भी भगवान शिव की आराधना जारी रखी और अपनी भक्ति से महादेव को प्रसन्न किया।
कहा जाता है कि भगवान शिव ने माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें श्राप से मुक्त किया और उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी कथा के कारण इस व्रत का नाम कोकिला व्रत पड़ा।
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कोकिला व्रत 2026 की पूजा विधि
कोकिला व्रत 2026 के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद व्रत का संकल्प लेकर पूजा की तैयारी की जाती है।
- भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करें।
- शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक करें।
- भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल, चंदन और अक्षत अर्पित करें।
- माता पार्वती को सुहाग सामग्री जैसे सिंदूर, चूड़ियां और चुनरी चढ़ाना शुभ माना जाता है।
- पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
- कोकिला व्रत की कथा सुनें और श्रद्धा के साथ उपवास रखें।
शाम के समय पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
कोकिला व्रत करने से क्या मिलता है फल?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कोकिला व्रत करने से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन और पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत करती हैं।
मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कोकिला व्रत का धार्मिक महत्व
कोकिला व्रत को प्रेम, समर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है। माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव के प्रति उनकी भक्ति इस व्रत की मुख्य प्रेरणा मानी जाती है।
धार्मिक विश्वास के अनुसार, जो भक्त पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ कोकिला व्रत करते हैं, उन्हें वैवाहिक सुख, सौभाग्य और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है।
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