जानें कैसे पुरानी दिल्ली को लटकते तारों से मुक्ति मिलेगी। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पुरानी दिल्ली की 26 गलियों के लिए ₹159.47 करोड़ की भूमिगत केबल परियोजना शुरू की।
पुरानी दिल्ली को लटकते तारों से मुक्ति: पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक गलियों में दशकों से फैली ‘मकड़जाल’ जैसी बिजली की तारों की समस्या अब इतिहास बनने जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने टाउन हॉल के सामने आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में 159.47 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना का विधिवत शुभारंभ किया। इस ऐतिहासिक कदम के साथ ही पुरानी दिल्ली को लटकते तारों से मुक्ति मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
26 गलियों का बदलेगा स्वरूप
इस परियोजना के पहले चरण में चांदनी चौक और उसके आस-पास के प्रमुख व्यावसायिक और रिहायशी इलाकों को कवर किया जाएगा। पुरानी दिल्ली को लटकते तारों से मुक्ति दिलाने के लिए किनारी बाजार, धर्मपुरा, नई सड़क और कूचा महाजनी समेत कुल 26 गलियों और सड़कों पर बिजली की तारों को पूरी तरह भूमिगत (Underground) किया जाएगा।
₹159.47 करोड़ का बड़ा बजट और समय सीमा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संबोधन के दौरान कहा कि पुरानी दिल्ली की विरासत को सुरक्षित रखने और हादसों को रोकने के लिए यह कदम अनिवार्य था। दिल्ली सरकार ने इस पूरी योजना के लिए 159.47 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। अधिकारियों के अनुसार, अगले दो से तीन साल के भीतर पूरी पुरानी दिल्ली के तारों को अंडरग्राउंड करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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सुरक्षा और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि लटकते तारों के कारण अक्सर शॉर्ट सर्किट और आग लगने की घटनाएं होती रहती थीं। पुरानी दिल्ली को लटकते तारों से मुक्ति मिलने के बाद न केवल क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि यह इलाका पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक और सुंदर दिखेगा।
दशकों का इंतजार हुआ खत्म
स्थानीय व्यापारियों और निवासियों के लिए यह खबर किसी उत्सव से कम नहीं है। लंबे समय से मांग की जा रही थी कि गलियों में लटके जर्जर तारों के जाल को हटाया जाए। मुख्यमंत्री के इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से अब चांदनी चौक की गलियां खुली और सुरक्षित नजर आएंगी।
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