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पंजाब विधानसभा में सियासी घमासान: ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026’ पर गरमाई राजनीति

पंजाब विधानसभा में जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026 पर सियासी घमासान तेज, AAP और विपक्ष में तीखी बयानबाजी।

पंजाब विधानसभा में पेश किए गए ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026’ को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है। सदन में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली। खासकर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता तरनप्रीत सिंह सोंड के बयान के बाद यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है।

इस पूरे विवाद का केंद्र जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026 बन गया है, जिसे लेकर सत्ता पक्ष इसे धार्मिक सम्मान और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने वाला कदम बता रहा है, जबकि विपक्ष की अनुपस्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विपक्ष की अनुपस्थिति पर AAP का हमला

AAP नेता तरनप्रीत सिंह सोंड ने सदन में विपक्ष, विशेषकर बादल गुट की अनुपस्थिति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो नेता वर्षों से पंथिक और धार्मिक भावनाओं की राजनीति करते आए हैं, वे इस महत्वपूर्ण अवसर पर सदन में मौजूद नहीं थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026 जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विपक्ष की गैरमौजूदगी उनकी राजनीतिक प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है। सोंड के अनुसार यह रवैया जनता और धार्मिक भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

पंथिक राजनीति पर उठाए सवाल

अपने बयान में तरनप्रीत सिंह सोंड ने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक दलों ने अतीत में पंथिक मुद्दों पर अपनी स्थिति बदलते हुए श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष अपनी गलतियों को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में वही दल अपने रुख से पीछे हट गए।

उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार न केवल राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाता है, बल्कि इससे जनता का भरोसा भी कमजोर होता है। इस संदर्भ में उन्होंने फिर से जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026 का उल्लेख करते हुए इसे एक जिम्मेदारीपूर्ण और संवेदनशील विधेयक बताया।

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धार्मिक सम्मान पर राजनीति नहीं होनी चाहिए

AAP नेता ने स्पष्ट कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता और सम्मान से जुड़े मामलों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि सभी राजनीतिक दलों को मिलकर इस तरह के विषयों पर गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026 केवल एक कानून नहीं बल्कि धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता से जुड़ा हुआ विषय है, जिस पर सभी को एकमत होना चाहिए।

सरकार का पक्ष: सामाजिक सद्भाव का कदम

विधानसभा में सरकार की ओर से इस विधेयक को एक सकारात्मक पहल बताया गया है। सरकार का दावा है कि जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026 का उद्देश्य धार्मिक सम्मान को मजबूत करना और समाज में आपसी सद्भाव को बढ़ावा देना है।

सरकारी पक्ष का कहना है कि यह बिल किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं है, बल्कि धार्मिक भावनाओं और सामाजिक एकता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

सियासी बहस का केंद्र बना विधेयक

जैसे-जैसे चर्चा आगे बढ़ी, जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026 पंजाब की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया। विपक्ष की अनुपस्थिति और सत्ता पक्ष के आरोपों ने इसे और अधिक विवादित बना दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़कों तक चर्चा का विषय बना रहेगा।

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