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अगस्त में कौन सी तीज मनाई जाएगी, हरियाली तीज या हरतालिका तीज? जानें दोनों में अंतर और सही तारीख

अगस्त 2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त को मनाई जाएगी, जबकि हरतालिका तीज 14 सितंबर को होगी। जानें दोनों तीज की तारीख और अंतर।

सावन और भाद्रपद के महीने में आने वाली तीज का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। खासतौर पर महिलाएं इन पर्वों का इंतजार करती हैं। साल 2026 में अगस्त महीने में हरियाली तीज मनाई जाएगी, जबकि हरतालिका तीज सितंबर में आएगी। दोनों पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित हैं, लेकिन इनकी तिथि, परंपराएं और व्रत के नियम अलग-अलग हैं।

ऐसे में अगर आप भी अगस्त में पड़ने वाली तीज और हरतालिका तीज की तारीख को लेकर असमंजस में हैं, तो यहां दोनों पर्वों की सही डेट और इनके बीच का अंतर आसान भाषा में जानिए।

हरियाली तीज 2026 कब है?

साल 2026 में हरियाली तीज का पर्व 15 अगस्त को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, इसलिए इस तीज का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

इस दिन महिलाएं सुहाग की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। कई जगहों पर महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं, हरी चूड़ियां पहनती हैं और हाथों में मेहंदी लगाती हैं। झूला झूलने की परंपरा भी इस पर्व से जुड़ी हुई है।

हरियाली तीज पर व्रत रखने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है, हालांकि हर महिला के लिए व्रत रखना अनिवार्य नहीं माना जाता। व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार नियमों का पालन करती हैं।

हरतालिका तीज 2026 की तारीख क्या है?

हरतालिका तीज 2026 में 14 सितंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है। इसे कई स्थानों पर ‘बड़ी तीज’ के नाम से भी जाना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। इसी कथा से हरतालिका तीज का संबंध बताया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती हैं।

हरतालिका तीज का व्रत कठिन माना जाता है। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं और पूरे दिन अन्न तथा जल का सेवन नहीं करतीं। शाम या निर्धारित पूजा मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।

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हरियाली तीज और हरतालिका तीज में क्या अंतर है?

हरियाली तीज और हरतालिका तीज दोनों ही भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित पर्व हैं, लेकिन दोनों की तिथि और पूजा परंपराएं अलग हैं।

हरियाली तीज: श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है।

हरतालिका तीज: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है।

हरियाली तीज: इस पर्व पर हरे रंग के कपड़े, हरी चूड़ियां और मेहंदी का विशेष महत्व माना जाता है।

हरतालिका तीज: इस दिन शिव-पार्वती की पूजा के साथ मिट्टी या बालू से उनकी प्रतिमा बनाने की परंपरा कई क्षेत्रों में है।

व्रत का अंतर: हरियाली तीज पर व्रत के नियम अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकते हैं, जबकि हरतालिका तीज का निर्जला व्रत अधिक कठिन माना जाता है।

परंपराओं का अंतर: हरियाली तीज में झूला झूलने और सावन के गीतों की परंपरा देखने को मिलती है, जबकि हरतालिका तीज में पूजा, कथा और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है।

क्यों खास है हरियाली तीज?

हरियाली तीज सावन के महीने में आती है और इसे प्रकृति की हरियाली से भी जोड़कर देखा जाता है। बारिश के मौसम में चारों तरफ हरियाली छाने के कारण इस पर्व का नाम हरियाली तीज पड़ा। कई क्षेत्रों में इस मौके पर महिलाएं एक-दूसरे को तीज की बधाई देती हैं और सामूहिक रूप से झूला झूलती हैं।

वहीं, नवविवाहित महिलाओं के लिए भी इस पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। कई परिवारों में बेटी को मायके बुलाकर तीज के अवसर पर कपड़े, श्रृंगार का सामान और मिठाइयां देने की परंपरा है।

हरतालिका तीज क्यों रखी जाती है?

मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी आस्था के आधार पर महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति और पति की दीर्घायु की कामना के लिए रखती हैं।

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा विधि-विधान से की जाती है। कई जगह महिलाएं रातभर जागकर भजन-कीर्तन करती हैं। इस तरह हरियाली तीज और हरतालिका तीज दोनों का अपना अलग धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।

अगस्त में कौन सी तीज मनाई जाएगी?

अगर आपके मन में यह सवाल है कि अगस्त 2026 में हरियाली तीज होगी या हरतालिका, तो इसका जवाब है—15 अगस्त 2026 को हरियाली तीज मनाई जाएगी। वहीं हरतालिका तीज इसके करीब एक महीने बाद 14 सितंबर 2026 को आएगी।

इसलिए अगस्त में तीज के लिए तैयारी कर रहे लोगों को हरियाली तीज की तारीख ध्यान में रखनी चाहिए। दोनों पर्वों का उद्देश्य और धार्मिक मान्यताएं भले ही भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी हों, लेकिन इनके व्रत और रीति-रिवाजों में स्पष्ट अंतर है।

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