राज्यदिल्ली

संजय सिंह की ‘रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो’ पदयात्रा का गाजियाबाद में समापन, पश्चिमी यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल

मेरठ से गाजियाबाद तक निकली पदयात्रा में रोजगार, शिक्षा और सामाजिक न्याय को लेकर जनता की आवाज बनी राजनीतिक बहस का केंद्र

संजय सिंह की ‘रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो’ पदयात्रा गाजियाबाद में संपन्न। पश्चिमी यूपी में रोजगार और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी की सक्रियता एक बार फिर सुर्खियों में है। पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह की ‘रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो’ पदयात्रा का समापन गाजियाबाद के अंबेडकर पार्क में हुआ। मेरठ से शुरू हुई यह यात्रा गाजियाबाद पहुंचकर समाप्त हुई, जिसने क्षेत्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

मेरठ से गाजियाबाद तक दिखा जनसमर्थन

यह पदयात्रा 16 मई 2026 को मेरठ से शुरू हुई थी और 20 मई 2026 को गाजियाबाद में संपन्न हुई। पूरे मार्ग में युवाओं, किसानों, शिक्षामित्रों, आशा कार्यकर्ताओं और छोटे व्यापारियों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।

लोगों ने बेरोजगारी, भर्ती घोटालों और पेपर लीक जैसी समस्याओं को लेकर खुलकर नाराजगी जताई। यात्रा के दौरान जगह-जगह लोगों ने संजय सिंह का स्वागत किया और अपनी समस्याएं साझा कीं।

जनता से सीधा संवाद, समस्याओं पर जोर

यात्रा के दौरान संजय सिंह लगातार लोगों के बीच मौजूद रहे और उनकी शिकायतों को सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि युवाओं और आम जनता की आवाज को सड़क से लेकर संसद तक उठाया जाएगा।

स्थानीय लोगों ने उनके सीधे संवाद और जमीनी मुद्दों पर फोकस की सराहना की।

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रोजगार और सामाजिक न्याय बने मुख्य मुद्दे

इस पदयात्रा का मुख्य फोकस रोजगार सृजन, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर रोक और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई रहा।

युवाओं का कहना है कि लगातार प्रयासों के बावजूद उन्हें रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं, जिससे उनमें निराशा बढ़ रही है।

दिल्ली और पंजाब मॉडल की चर्चा

यात्रा के दौरान आम आदमी पार्टी के दिल्ली और पंजाब मॉडल की भी चर्चा देखने को मिली। लोगों ने सरकारी स्कूलों में सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती और बिजली-पानी व्यवस्था में बदलाव को लेकर उत्तर प्रदेश में भी ऐसे ही सुधार की मांग रखी।

2027 चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज

इस पदयात्रा के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव में रोजगार, शिक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं।

यह पदयात्रा न केवल संगठनात्मक मजबूती का संकेत देती है, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना भी बढ़ाती है।

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