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क्लर्क से लेकर पुलिसकर्मियों तक, पंजाब के कर्मचारियों की सैलरी ज्यादा? हरपाल चीमा ने DA विवाद पर रखी सरकार की बात

पंजाब में DA विवाद के बीच हरपाल चीमा ने कर्मचारियों की सैलरी, 42% DA और ₹14,191 करोड़ के बकाये पर सरकार का पक्ष बताया।

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर चल रहा विवाद गुरुवार को फिर चर्चा में रहा। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मंत्री अमन अरोड़ा और बलजीत कौर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि मूल वेतन और DA को मिलाकर पंजाब सरकारी कर्मचारी देश के कई राज्यों के कर्मचारियों की तुलना में बेहतर वेतन पा रहे हैं।

कई राज्यों से ज्यादा वेतन मिलने का दावा

हरपाल सिंह चीमा के मुताबिक पंजाब में कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी देश में ऊंचे स्तर पर है। उन्होंने कहा कि क्लर्क, ड्राइवर, स्टेनोग्राफर, शिक्षक और पुलिसकर्मियों समेत कई वर्गों के पंजाब सरकारी कर्मचारी केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में अधिक वेतन प्राप्त कर रहे हैं।

चीमा ने यह भी दावा किया कि पंजाब के कर्मचारियों का वेतन गुजरात के सरकारी कर्मचारियों की तुलना में करीब 28 प्रतिशत अधिक है। उनके अनुसार मूल वेतन और DA को एक साथ देखने पर पंजाब के कर्मचारी हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के कर्मचारियों से भी आगे हैं।

28% से बढ़कर 42% हुआ DA

DA को लेकर सरकार पर उठ रहे सवालों के बीच चीमा ने कहा कि मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के समय कर्मचारियों को 28 प्रतिशत DA मिल रहा था। इसके बाद इसे बढ़ाकर अक्टूबर में 34 प्रतिशत, दिसंबर 2023 में 38 प्रतिशत और नवंबर 2024 में 42 प्रतिशत किया गया।

सरकार का कहना है कि DA को लेकर विपक्ष की ओर से कई ऐसी बातें कही जा रही हैं, जिनसे कर्मचारियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। चीमा ने कहा कि सरकार लंबित बकाया राशि का भुगतान करने की दिशा में भी काम कर रही है।

2016 से 2021 के बीच के ₹14,191 करोड़ बकाया

वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2016 से 2021 के बीच का करीब ₹14,191 करोड़ का बकाया अभी भी चर्चा का बड़ा मुद्दा है। उनके अनुसार यह अवधि पिछली कांग्रेस और SAD-BJP सरकारों के कार्यकाल से जुड़ी है।

चीमा ने दावा किया कि मौजूदा सरकार अब तक कर्मचारियों और पेंशनर्स को करीब ₹4,500 करोड़ का भुगतान कर चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि बकाया राशि के निपटारे को लेकर सरकार ने हाई कोर्ट के समक्ष एक लिक्विडेशन प्लान प्रस्तुत किया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

कर्मचारियों और पेंशनर्स पर राजस्व का 51% खर्च

हरपाल चीमा ने कहा कि पंजाब अपने कुल राजस्व का करीब 51 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारियों और पेंशनर्स पर खर्च करता है। उनके अनुसार अन्य राज्यों में यह औसत करीब 38 प्रतिशत है।

सरकार का तर्क है कि पंजाब सरकारी कर्मचारी पहले से ही वेतन और DA के संयुक्त आधार पर कई राज्यों के कर्मचारियों की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं। इसी आधार पर सरकार DA से जुड़े मौजूदा विवाद को देख रही है।

पंजाब में DA तय करने के नियम क्या हैं?

मंत्री बलजीत कौर ने DA को लेकर सरकार की कानूनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि पंजाब में कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और DA का निर्धारण Punjab Civil Services Revised Pay Rules, 2021 के तहत किया जाता है। ये नियम संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत बनाए गए हैं।

उनके अनुसार इन नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत पंजाब को केंद्र सरकार के DA इंडेक्स, दर या फॉर्मूले को अपने आप लागू करना जरूरी हो। राज्य सरकार के पास DA की राशि और भुगतान का समय तय करने का अधिकार है।

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हाई कोर्ट में कर्मचारियों की नई याचिका

DA विवाद अब कानूनी स्तर पर भी आगे बढ़ रहा है। पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इसके बाद कर्मचारियों की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में एक और याचिका दायर की गई है। इस मामले की सुनवाई गुरुवार को प्रस्तावित है।

चीमा ने विपक्ष पर DA मामले में गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर पंजाब में DA को लेकर कुछ सिद्धांतों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो क्या वही व्यवस्था हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में भी लागू होनी चाहिए।

अमन अरोड़ा ने कर्मचारियों से बातचीत की अपील की

मंत्री अमन अरोड़ा ने सरकारी कर्मचारियों को प्रशासन की रीढ़ बताते हुए कहा कि कर्मचारी और जनप्रतिनिधि सरकार के दो महत्वपूर्ण हिस्से हैं। उन्होंने कर्मचारियों से सरकार के साथ बातचीत के जरिए समस्या का समाधान निकालने की अपील की।

अरोड़ा ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और उनकी कुछ मांगें जायज हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने राजनीतिक दलों पर कर्मचारियों को भ्रमित करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि पंजाब में फिलहाल 42 प्रतिशत DA दिया जा रहा है। केंद्र में DA की दर अधिक होने का मतलब यह नहीं है कि पंजाब सरकार को भी उसी दर या उसी फॉर्मूले को अनिवार्य रूप से लागू करना होगा।

सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत पर जोर

DA विवाद के बीच सरकार की ओर से लगातार बातचीत का रास्ता अपनाने की बात कही जा रही है। वहीं, पंजाब सरकारी कर्मचारी अपने बकाया और DA से जुड़े मुद्दों को लेकर कानूनी लड़ाई भी आगे बढ़ा रहे हैं।

अब इस मामले में हाई कोर्ट की अगली सुनवाई और सरकार-कर्मचारी पक्ष के बीच होने वाली बातचीत पर नजर रहेगी। पंजाब सरकारी कर्मचारी से जुड़े DA और एरियर का मुद्दा आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में अहम विषय बना रह सकता है।

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