पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट तकनीक से वन सीमाओं की डिजिटल मैपिंग शुरू की गई, अतिक्रमण रोकने की बड़ी पहल।
पंजाब एक बार फिर देश में तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनकर उभरा है। राज्य सरकार ने हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट डेटा की मदद से वन सीमाओं की डिजिटल मैपिंग की एक बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और वैज्ञानिक प्रबंधन को भी मजबूत करेगा।
इस पहल के तहत लगभग 2,000 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र और करीब 50,000 किलोमीटर नहरों, सड़कों तथा रेलवे लाइनों का विस्तृत डिजिटल मैप तैयार किया जाएगा।
अतिक्रमण रोकने और विवाद सुलझाने में मददगार तकनीक
सरकार का मानना है कि दशकों से लंबित भूमि विवादों और वन भूमि पर अतिक्रमण की समस्याओं को यह तकनीकी समाधान काफी हद तक खत्म कर सकता है। सैटेलाइट आधारित मैपिंग से वास्तविक सीमाओं की सटीक पहचान संभव होगी, जिससे अवैध कब्जों पर रोक लगाना आसान हो जाएगा।
Punjab is becoming the first state in the country to map forest boundaries using high-resolution satellite data, a major step towards protecting forest land and preventing encroachments.
The mapping exercise will cover nearly 2,000 sq km of forest areas along with around 50,000… pic.twitter.com/4CWFtGTXJB
— AAP Punjab (@AAPPunjab) May 25, 2026
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वन विभाग और संबंधित एजेंसियों को अब एक मजबूत डिजिटल डेटाबेस उपलब्ध होगा, जो निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक तेज और सटीक बनाएगा।
मान सरकार की तकनीक-आधारित शासन की दिशा में बड़ी पहल
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार लगातार डिजिटल गवर्नेंस और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा दे रही है। यह परियोजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सरकार का लक्ष्य है कि पारंपरिक और पुराने रिकॉर्ड सिस्टम को बदलकर पूरी तरह डेटा-आधारित और तकनीक-संचालित प्रशासन लागू किया जाए। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि भ्रष्टाचार और गलत रिकॉर्डिंग की संभावना भी कम होगी।
पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा नया आधार
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सैटेलाइट मैपिंग सिस्टम पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा। इससे वन क्षेत्रों की निगरानी बेहतर होगी और अवैध कटाई या अतिक्रमण पर तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी।
इसके अलावा, नहरों और रेलवे लाइनों के आसपास की भूमि का सटीक डेटा होने से विकास परियोजनाओं की योजना भी अधिक प्रभावी तरीके से बनाई जा सकेगी।
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