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पंजाब शिक्षा में बना नंबर 1: अरविंद केजरीवाल का बड़ा दावा, कभी 27वें स्थान से लेकर आज पहले पायदान तक का ऐतिहासिक सफर

पंजाब शिक्षा में नंबर 1 बना, 27वें स्थान से पहले पायदान तक पहुंचा। अरविंद केजरीवाल ने इसे शिक्षा क्रांति बताया और दिल्ली मॉडल का असर बताया।

पंजाब ने शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त कर लिया है। कभी सरकारी स्कूल शिक्षा गुणवत्ता में 27वें स्थान पर रहने वाला पंजाब आज शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है और इसने केरल जैसे अग्रणी राज्य को भी पीछे छोड़ दिया है। यह दावा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा सोशल मीडिया पर किया गया है।

शिक्षा सुधार का नया मॉडल बनता पंजाब

अरविंद केजरीवाल के अनुसार, पंजाब में बीते कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों की स्थिति में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर शिक्षकों की ट्रेनिंग, डिजिटल क्लासरूम और प्रशासनिक निगरानी तक कई स्तरों पर बदलाव किए गए हैं।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जिस तरह दिल्ली में शिक्षा क्रांति के बाद सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदली, उसी मॉडल को अब पंजाब में भी लागू किया गया है। इसी का परिणाम है कि राज्य ने शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में पहला स्थान हासिल किया है।

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27वें स्थान से नंबर 1 स्थान तक का सफर

कुछ साल पहले तक पंजाब सरकारी स्कूल शिक्षा गुणवत्ता में 27वें स्थान पर था। लेकिन लगातार सुधार, नई शिक्षा नीतियों और स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के बाद राज्य ने तेजी से प्रगति की है।

आज पंजाब के सरकारी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ी है, परीक्षा परिणाम बेहतर हुए हैं और ड्रॉपआउट रेट में भी कमी आई है।

दिल्ली मॉडल का असर

पंजाब में शिक्षा सुधार को अक्सर दिल्ली मॉडल से जोड़कर देखा जाता है। दिल्ली में शिक्षा सुधारों के दौरान जिस तरह स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट क्लास और शिक्षक प्रशिक्षण पर जोर दिया गया था, उसी रणनीति को पंजाब में भी अपनाया गया है।

इस बदलाव को लेकर आम आदमी पार्टी लगातार इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।

राजनीतिक बयान और चर्चा

अरविंद केजरीवाल के इस ट्वीट के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। समर्थक इसे शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दल सरकार से इस दावे पर विस्तृत रिपोर्ट और पारदर्शी आंकड़े पेश करने की मांग कर रहे हैं।

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