राज्यगुजरात

NFHS-6 के कुपोषण रिपोर्ट मुद्दे पर AAP प्रदेश संगठन मंत्री डॉ. करन बारोट की प्रेस कॉन्फ्रेंस

कुपोषण की लड़ाई में सरकार विज्ञापनों में जीती लेकिन जमीनी हकीकत में हार गई: डॉ. करन बारोट AAP

भाजपा सरकार के शासन में बच्चों को नहीं बल्कि चहेतों को पोषण मिल रहा है: डॉ. करन बारोट AAP

गुजरात के 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में से 35% बच्चों की लंबाई उम्र के अनुसार नहीं बढ़ी है: डॉ. करन बारोट AAP

5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में से 20% बच्चों का वजन कम है: डॉ. करन बारोट AAP

आम आदमी पार्टी गुजरात प्रदेश संगठन मंत्री एवं प्रदेश मुख्य प्रवक्ता डॉ. करन बारोट ने गुजरात में कुपोषण को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कुपोषण दूर करने के लिए पोषण के नाम पर सरकार द्वारा दिन-प्रतिदिन खर्च बढ़ाया गया है, लेकिन बच्चों का वजन नहीं बढ़ रहा है। सरकार कहती है कि कुपोषण के लिए हम AI सिस्टम लागू करेंगे, लेकिन बच्चों के भूखे पेट को मापने के लिए भी कोई AI सिस्टम सरकार को लागू करना चाहिए। कुपोषण की लड़ाई में सरकार विज्ञापनों में तो जीत रही है, लेकिन जमीन पर कहीं न कहीं हार रही है, ऐसा हमारा स्पष्ट मानना है।

मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर द्वारा NFHS-6 की रिपोर्ट जारी की गई है और यह रिपोर्ट सरकार की पोल खोल रही है कि कुपोषण के नाम पर वर्षों से कोई प्रभावी काम नहीं हुआ है। इस रिपोर्ट के अनुसार पांच वर्ष से कम आयु के और उम्र के अनुसार कम लंबाई वाले बच्चों की संख्या शहरों में 28.2 प्रतिशत और गांवों में 39.5 प्रतिशत है, अर्थात औसतन 35.5 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिनका शारीरिक विकास पर्याप्त नहीं हुआ है। इसके बाद लंबाई के अनुसार कम वजन वाले और कुपोषित बच्चों की संख्या शहरों में 15.5 प्रतिशत और गांवों में 23.5 प्रतिशत है, अर्थात औसतन 20 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या शहरों में 3.8 प्रतिशत और गांवों में 6.3 प्रतिशत है। जबकि कम वजन वाले बच्चों की संख्या शहरों में 27.2 प्रतिशत और गांवों में 40.5 प्रतिशत है। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि गुजरात में कुपोषण की स्थिति गंभीर है।

सरकार कहती है कि डबल इंजन की सरकार में विकास हो रहा है, लेकिन हमें लगता है कि पोषण से ज्यादा तो बिचौलियों और चहेतों का पोषण हो रहा है। सरकार द्वारा विधानसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में कुपोषित बच्चों के आहार पर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद गुजरात में 0 से 6 वर्ष आयु के 5.70 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार हुए हैं, जिनमें से 4.38 लाख बच्चे अंडरवेट हैं और 1.31 लाख बच्चे गंभीर रूप से अंडरवेट हैं। सरकार ने 24 करोड़ रुपये की लागत से AI मॉनिटरिंग सिस्टम बनाने की बात की है, लेकिन NFHS-6 की रिपोर्ट बताती है कि सरकार कुपोषण दूर करने में विफल रही है।

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‘आप’ नेता डॉ. करन बारोट ने आगे कहा कि सरकार द्वारा मुख्यमंत्री पौष्टिक अल्पाहार योजना, दूध संजीवनी योजना, सुखड़ी योजना, बालशक्ति योजना, मुख्यमंत्री मातृशक्ति योजना, पोषण सुधा योजना और मिशन आंगनवाड़ी पोषण 2.0 जैसी अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। ये सभी योजनाएं कुपोषण कम करने के लिए हैं, लेकिन यदि इतने करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद गुजरात के एक तिहाई बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं, तो इसे हम सरकार की सबसे बड़ी विफलता मानते हैं। यदि यह विशेष आहार और करोड़ों रुपये का खर्च वास्तव में बच्चों तक पहुंचा होता, तो आज आंकड़े कुछ अलग दिखाई देते।

सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि कुपोषण दूर करना सरकार की प्राथमिकता है या नहीं। आम आदमी पार्टी की ओर से हमारी मांग है कि कुपोषण को तत्काल प्रभाव से सार्वजनिक स्वास्थ्य की आपातकालीन समस्या घोषित किया जाए और सरकार मीडिया तथा गुजरात की जनता के सामने आकर जवाब दे कि इतने करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद गुजरात अभी तक कुपोषण मुक्त क्यों नहीं बन पाया है। सरकार को अपनी विफलता स्वीकार करते हुए तत्काल कदम उठाने चाहिए। आदिवासी क्षेत्रों में विशेष रूप से कुपोषण की स्थिति अधिक गंभीर दिखाई देती है। हाल ही में जारी NFHS-6 की रिपोर्ट सरकार की सबसे बड़ी विफलता को उजागर करती है और दर्शाती है कि कुपोषण के खिलाफ प्रभावी कार्य नहीं हुआ है। सरकार द्वारा पोषण ट्रैकर जैसी व्यवस्थाएं लागू होने के बावजूद अनेक बच्चे आज भी कुपोषित हैं। सरकार के अपने आंकड़े ही दर्शाते हैं कि गुजरात कुपोषण मुक्त नहीं बना है। इसलिए जब सरकार बड़े-बड़े दावे और घोषणाएं करती है, तब अब गुजरात की जनता भ्रमित होने वाली नहीं है, क्योंकि भाजपा शासन की वास्तविकता आज आंकड़ों के माध्यम से जनता के सामने आ रही है।

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