सावन में व्रत: सावन माह में शुरू कर सकते हैं ये 4 व्रत, जानें धार्मिक महत्व और मिलने वाले लाभ
सावन में व्रत शुरू करना शुभ माना जाता है। जानें सोलह सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व।
सावन में व्रत: हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान शिव भक्त महादेव की पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, मंत्र जाप और व्रत-उपवास करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से भक्तों को शुभ फल प्राप्त होते हैं।
इस वर्ष सावन माह की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से हुई है और इसका समापन 28 अगस्त 2026 को होगा। ऐसे में अगर आप किसी धार्मिक व्रत की शुरुआत करने की सोच रहे हैं तो सावन में व्रत शुरू करना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं सावन के दौरान किन व्रतों की शुरुआत की जा सकती है और उनका क्या धार्मिक महत्व है।
1. सावन में शुरू करें सोलह सोमवार व्रत
भगवान शिव को समर्पित सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत सावन से करना शुभ माना जाता है। इस व्रत में सोमवार के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार सोलह सोमवार का व्रत करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होने और मनचाहा जीवनसाथी मिलने की कामना की जाती है। विवाहित लोग भी सुखी दांपत्य जीवन की कामना से इस व्रत का संकल्प लेते हैं।
जो लोग लंबे समय से सोलह सोमवार व्रत शुरू करने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए सावन में व्रत का यह संकल्प विशेष आस्था से जुड़ा माना जाता है।
2. सावन प्रदोष से शुरू कर सकते हैं प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत भगवान शिव की उपासना के लिए रखा जाने वाला महत्वपूर्ण व्रत है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है।
अगर आप प्रदोष व्रत की शुरुआत करना चाहते हैं तो सावन के प्रदोष से इसका संकल्प लिया जा सकता है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत और भगवान शिव की विधिवत पूजा करने से जीवन की परेशानियों से मुक्ति और सुख-शांति की प्राप्ति की कामना की जाती है।
सावन भगवान शिव को प्रिय माना जाता है, इसलिए इस महीने में सावन में व्रत रखने और शिव आराधना करने का विशेष महत्व बताया गया है।
3. सावन शिवरात्रि से शुरू करें मासिक शिवरात्रि व्रत
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस अवसर पर भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करते हैं।
अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से मासिक शिवरात्रि व्रत शुरू करना चाहता है तो सावन की शिवरात्रि से इसकी शुरुआत करने की धार्मिक परंपरा मानी जाती है। भक्त इस दिन उपवास रखने के साथ शिवलिंग पर जल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार मासिक शिवरात्रि की पूजा से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना पूरी होने की मान्यता है।
4. सावन के मंगलवार से मंगला गौरी व्रत की शुरुआत
सावन के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित है और खासतौर पर सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार मंगला गौरी व्रत करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलने की कामना की जाती है। इसके साथ ही पति की लंबी आयु, दांपत्य सुख और परिवार की समृद्धि के लिए भी यह व्रत किया जाता है।
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संतान सुख और पारिवारिक खुशहाली की कामना से भी महिलाएं मंगला गौरी की पूजा करती हैं। इसलिए सावन में व्रत शुरू करने वालों के लिए मंगला गौरी व्रत भी एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जाता है।
सावन में व्रत रखने से पहले जानें जरूरी बात
धार्मिक मान्यताओं में व्रत को श्रद्धा और संकल्प से जोड़कर देखा जाता है। किसी भी व्रत की शुरुआत करने से पहले उसकी तिथि, पूजा विधि और पारंपरिक नियमों की सही जानकारी लेना बेहतर होता है। अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों में तिथियों को लेकर अंतर हो सकता है।
सावन में व्रत रखने वाले भक्त अपनी आस्था के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकते हैं। हालांकि, व्रत के दौरान स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना जरूरी है। किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या, गर्भावस्था या नियमित दवाओं की स्थिति में उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
सावन में शुरू किए जाने वाले व्रतों की सूची
सोलह सोमवार व्रत – विवाह और सुखी दांपत्य जीवन की कामना
प्रदोष व्रत -भगवान शिव की कृपा और जीवन में सुख-शांति की कामना
मासिक शिवरात्रि व्रत – शिव-पार्वती की आराधना और पारिवारिक सुख की कामना
मंगला गौरी व्रत -अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली की कामना
इस तरह सावन में व्रत की शुरुआत करने की धार्मिक परंपरा भक्तों के लिए आस्था और शिव आराधना से जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार इस पवित्र महीने में भगवान शिव की भक्ति, व्रत और पूजा-अर्चना करने से मन को शांति मिलती है और भक्त अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
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