राज्यउत्तराखण्ड

बाल्य देखभाल अवकाश नियमों में बड़ा बदलाव, महिला कर्मचारियों और एकल अभिभावकों को राहत

सरकार ने बाल्य देखभाल अवकाश की स्वीकृति प्रक्रिया सरल की, अब उपार्जित अवकाश की तरह होगा प्रबंधन

बाल्य देखभाल अवकाश नियमों में बदलाव, महिला कर्मचारियों और एकल अभिभावकों को राहत। सरकार ने अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया को आसान बनाया।

उत्तर प्रदेश सरकार ने बाल्य देखभाल अवकाश नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए इसकी स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बना दिया है। नए आदेश के अनुसार अब बाल्य देखभाल अवकाश को उपार्जित अवकाश (Earned Leave) की तरह ही स्वीकृत किया जाएगा।

सरकारी आदेश का उद्देश्य अवकाश प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना है, ताकि महिला कर्मचारियों और एकल अभिभावकों को किसी प्रकार की प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

बाल्य देखभाल अवकाश प्रक्रिया में बड़ा सुधार

संशोधित आदेश के अनुसार अब बाल्य देखभाल अवकाश की स्वीकृति का अधिकार उन सक्षम अधिकारियों को दिया गया है, जो उपार्जित अवकाश को स्वीकृत करते हैं। पहले यह अधिकार केवल नियुक्ति प्राधिकारी के पास था, लेकिन अब प्रक्रिया को सरल बनाते हुए इसे व्यापक किया गया है।

इस बदलाव से बाल्य देखभाल अवकाश की मंजूरी में लगने वाला समय कम होगा और कर्मचारियों को राहत मिलेगी।

also read:- उत्तराखंड में अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश,सीएम पुष्कर सिंह धामी

किसे मिलेगा बाल्य देखभाल अवकाश

आदेश के मुताबिक राज्य सरकार की महिला कर्मचारियों और एकल अभिभावकों (महिला एवं पुरुष दोनों) को पूरे सेवाकाल में अधिकतम दो वर्ष का बाल्य देखभाल अवकाश दिया जाता है। यह अवकाश कुछ निर्धारित शर्तों के तहत प्रदान किया जाता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि बाल्य देखभाल अवकाश के दौरान आने वाले सभी सार्वजनिक अवकाश भी इसी अवधि में शामिल माने जाएंगे।

पुराने आदेश में भी बदलाव की पुष्टि

शासनादेश (1 जून 2003) के अनुसार अब बाल्य देखभाल अवकाश को उपार्जित अवकाश की तरह ही माना जाएगा। इसका उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाना है।

For English News: http://newz24india.in

Related Articles

Back to top button