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Peddi Review: राम चरण की दमदार परफॉर्मेंस ने जीता दिल, फर्स्ट हाफ कमजोर लेकिन सेकेंड हाफ ने संभाली फिल्म

राम चरण और जाह्नवी कपूर की फिल्म ‘पेद्दी’ में दिखा नया एक्सपेरिमेंट, इमोशनल क्लाइमैक्स और एक्टिंग बनी सबसे बड़ी ताकत

Peddi Review: राम चरण की दमदार एक्टिंग वाली फिल्म, कमजोर फर्स्ट हाफ लेकिन इमोशनल सेकेंड हाफ और शानदार क्लाइमैक्स ने दिल जीता।

Peddi Review: राम चरण और जाह्नवी कपूर स्टारर फिल्म ‘पेद्दी’ 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म अपने अनोखे कॉन्सेप्ट और राम चरण की जबरदस्त एक्टिंग के कारण चर्चा में बनी हुई है। हालांकि फिल्म पूरी तरह परफेक्ट नहीं है, लेकिन इसका सेकेंड हाफ और क्लाइमैक्स दर्शकों को बांधकर रखता है।

फिल्म एक ऐसे गांव की कहानी दिखाती है जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी है और ट्रेन तक नहीं रुकती। इसी गांव में रहने वाला “पेद्दी” अपने गांव को पहचान दिलाने के लिए संघर्ष करता है। कहानी भावनात्मक और सामाजिक मुद्दों को छूने की कोशिश करती है।

कहानी (Storyline)

फिल्म की कहानी आंध्र प्रदेश के एक अनाम गांव पर आधारित है। यह गांव पहचान के संकट से जूझ रहा है। यहां लोगों को अस्पताल पहुंचने के लिए भी बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। गांव का ही एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी “पेद्दी” अपने गांव को सम्मान और पहचान दिलाने की लड़ाई लड़ता है।

फिल्म कैसी है? (Overall Peddi Review)

Peddi Review: फिल्म का पहला हिस्सा थोड़ा कमजोर और धीमा लगता है, जहां कहानी को जरूरत से ज्यादा खींचा गया है। इससे दर्शकों का कनेक्शन टूटता हुआ महसूस होता है।

लेकिन सेकेंड हाफ में फिल्म अचानक रफ्तार पकड़ लेती है और कहानी मजबूत हो जाती है। आखिरी हिस्से में आने वाला इमोशनल मोनोलॉग दर्शकों को भावुक कर देता है।

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फिल्म की लंबाई लगभग 3 घंटे है, जो थोड़ी भारी लगती है, लेकिन म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर माहौल को संभालते हैं।

एक्टिंग (Performances)

इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत राम चरण हैं। उन्होंने अपने करियर में शायद अब तक का सबसे इंटेंस और इमोशनल परफॉर्मेंस दिया है। उनका किरदार “पेद्दी” पूरी फिल्म का केंद्र है।

जगपति बाबू और शिव राजकुमार ने भी मजबूत अभिनय किया है। दिव्येंदु अपने रोल में प्रभाव छोड़ते हैं। वहीं जाह्नवी कपूर ग्लैमर और स्क्रीन प्रेजेंस तो देती हैं, लेकिन उनका अभिनय औसत लगता है। बोमन ईरानी और रवि किशन को सीमित स्क्रीन स्पेस मिला है।

डायरेक्शन और राइटिंग

डायरेक्टर बुची बाबू साना ने एक नया प्रयोग करने की कोशिश की है, लेकिन फर्स्ट हाफ की कमजोर राइटिंग फिल्म को थोड़ा पीछे खींचती है। हालांकि सेकेंड हाफ में निर्देशन मजबूत हो जाता है और कहानी सही दिशा में बढ़ती है।

म्यूजिक

ए आर रहमान का संगीत फिल्म के मूड के अनुसार अच्छा काम करता है। बैकग्राउंड स्कोर कई दृश्यों को प्रभावशाली बनाता है।

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