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पंजाब बंद: जालंधर-दिल्ली नेशनल हाईवे जाम, बाजार बंद; सिख कैदियों की रिहाई और पैरोल की मांग

पंजाब बंद के दौरान जालंधर-दिल्ली नेशनल हाईवे पर जाम लगा। जानें बंद का असर, बाजारों की स्थिति और सिख कैदियों की रिहाई व पैरोल की मांग।

पंजाब बंद का असर शुक्रवार को जालंधर में भी देखने को मिला। कौमी इंसाफ मोर्चा की ओर से बुलाए गए बंद के दौरान शहर के कई बाजार बंद रहे। बंद का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक रखा गया था। किसान यूनियनों और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने भी इस बंद का समर्थन किया।

बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जालंधर-दिल्ली नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया। इससे हाईवे पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और यात्रियों व वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

जालंधर में बंद का दिखा असर

पंजाब बंद के आह्वान के बाद सुबह से ही जालंधर के कई इलाकों में गतिविधियां प्रभावित रहीं। कई दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर बंद का समर्थन किया। प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे और अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई।

सबसे ज्यादा असर जालंधर-दिल्ली नेशनल हाईवे पर देखने को मिला, जहां प्रदर्शनकारियों के जाम लगाने से यातायात प्रभावित हुआ। हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों को रास्ते में रुकना पड़ा, जिससे आवाजाही में परेशानी हुई।

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सिख कैदियों की रिहाई मुख्य मांग

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, पंजाब बंद के पीछे प्रमुख मांग सिख कैदियों की रिहाई है। समर्थकों का कहना है कि लंबे समय से जेल में बंद सिख कैदियों के मामलों पर सरकार को मानवीय दृष्टिकोण से विचार करना चाहिए।

बंद समर्थकों ने सरकार से संबंधित मामलों की समीक्षा कर उचित कदम उठाने की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान इस मुद्दे को लेकर नारेबाजी भी की गई।

जगतार सिंह हवारा को पैरोल देने की मांग

प्रदर्शनकारियों ने जगतार सिंह हवारा को कम से कम 10 दिन की पैरोल देने की मांग भी उठाई। समर्थकों के अनुसार पैरोल मिलने पर हवारा अपनी बुजुर्ग मां से मुलाकात कर सकेंगे।

जगतार सिंह हवारा 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। बंद समर्थकों ने सरकार से उनकी पैरोल की मांग पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।

किसान संगठनों और धार्मिक संगठनों का समर्थन

पंजाब बंद को किसान यूनियनों के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक संगठनों का भी समर्थन मिला। संगठनों से जुड़े लोगों ने बंद के जरिए सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की कोशिश की।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर सरकार को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए। वहीं बंद के कारण आम लोगों को हुई असुविधा भी सामने आई।

हाईवे पर यातायात प्रभावित

जालंधर-दिल्ली नेशनल हाईवे पर जाम के चलते कई वाहन कुछ समय तक फंसे रहे। हाईवे पंजाब को दिल्ली और अन्य क्षेत्रों से जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों में शामिल है, इसलिए यहां यातायात प्रभावित होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

पंजाब बंद का असर दोपहर 2 बजे तक रहने का आह्वान किया गया था। बंद के दौरान बाजारों और प्रमुख मार्गों पर पुलिस-प्रशासन की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहीं।

सरकार से मांगों पर विचार की अपील

बंद के अंत में प्रदर्शनकारियों ने सरकार से सिख कैदियों की रिहाई और जगतार सिंह हवारा को पैरोल देने सहित अपनी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। समर्थकों का कहना है कि इन मुद्दों पर सरकार को संबंधित पक्षों के साथ संवाद कर समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

कुल मिलाकर, पंजाब बंद के चलते जालंधर में बाजारों के साथ प्रमुख हाईवे पर भी असर पड़ा और कुछ समय के लिए यातायात व्यवस्था प्रभावित रही।

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